इब्न ए आदम
असम में मुसलमान 34% हैं , वहाँ पर अजमल साहब से कांग्रेस ने गठबंधन किया और नतीजा फिर से भाजपा की सरकार बन गयी । बंगाल में अब्बास साहब ने पार्टी बनायी , लेफ़्ट और कांग्रेस ने उनसे गठबंधन किया , नतीजा लेफ़्ट और कांग्रेस बंगाल में ज़ीरो पर आ गए । अब्बास साहब का एक विधायक आ गया ।
बिहार में मुख्यमंत्री पद के दावेदार कुशवाह ने AIMIM और दूसरी कई पार्टियों का गठबंधन तैयार किया । कुशवाह अपनी सीट तक हार गए । गठबंधन में किसी पार्टी को कोई सीट नहीं मिली । बसपा को एक सीट मिली जो बाद में नीतीश कुमार के साथ चला गया और मीम को पाँच सीट मिली जिनकी अभी तक तो विधानसभा में कोई relevance नहीं है ।
महाराष्ट्र में प्रकाश अम्बेडकर ने AIMIM से गठबंधन किया , प्रकाश अम्बेडकर की पार्टी को एक सीट नहीं मिली , मीम को दो सीट मिली । उन दो विधायकों की अभी तक तो महाराष्ट्र में कोई relevance दिखाई नहीं देती , आगे अल्लाह मालिक है ।
जब आप किसी धर्म या जाति के नाम पर पार्टी चलाना चाहते हो तो भाजपा का विरोध क्यों करते हो ?? भाजपा भी तो धर्म के नाम पर ही वोट माँगती है। बस इतना ही तो फ़र्क़ है कि आप धर्म के नाम पर थोड़ा नर्मी से वोट माँगते हो और भाजपा पूरी शिद्दत से वोट माँगती है । आप धर्म के नाम पर वोट माँगकर 4-6 सीट जीत सकते हो और भाजपा सरकार बना लेती है ।
GDP , बेरोज़गारी, शिक्षा , स्वास्थ्य , सड़क क्या आपके मुद्दे नहीं है ?? इन मुद्दों पर आप वोट क्यों नहीं माँगते , क्यों नहीं देते ??

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