इब्न ए आदम
2012 में जब अखिलेश यादव की सरकार बनी तो प्रदेश में बिजली बहुत कम आती थी । पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तब हफ़्ता चलता था , एक हफ़्ता दिन में बिजली आती थी और एक हफ़्ता रात में । उसमें भी बार बार बिजली आती जाती रहती थी ।
अखिलेश यादव ने अपनी सरकार में बिजली के उत्पादन पर बहुत काम किया । पूरे प्रदेश के पुराने और जर्जर तार बदलवाए जिससे बिजली का लॉस घटा । कई बिजली उत्पादन केंद्र बनाए । 2016 तक अखिलेश यादव के समय में बिजली की व्यवस्था प्रदेश में बहुत अच्छी हो गयी । हमारे यहाँ क़स्बों में 18-20 घंटे बिजली आती थी और ज़िले में 20-22 घंटे ।
योगी सरकार आयी और प्रॉपगैंडा तंत्र ने यह मशहूर करना शुरू कर दिया कि योगी राज में बिजली शानदार आ रही है । आज़म ख़ान साहब ने एक बार विधान सभा में सरकार से यह सवाल भी पूछा था कि सरकार बताए कि उसने अपने अब तक के कार्यकाल में क्या एक यूनिट भी उत्पादन बढ़ाया है , अगर बढ़ाया है तो कहाँ बढ़ाया है । आज़म ख़ान साहब के सवाल का जवाब तो नहीं मिला लेकिन जेल मिल गयी ।
अब चार साल तक पिछली सरकार की उपलब्धि को अपनी उपलब्धि बताने वालों ने ना तो जर्जर हो रहे तारों पर कोई काम किया और ना ही उत्पादन केंद्रो को सही से संचालित किया । नतीजा यह हुआ कि फ़ोटो में दिखने वाला हाथ का पंखा जो हमारे प्रदेश से ग़ायब हो गया था वो अब फिर से प्रदेशवासियो के हाथ में आ गया है ।
वैसे सुना है गंगोह ( सहारनपुर ) में बड़े खूबसूरत हाथ के पंखे बनते हैं । हो सकता है योगी जी लुप्त होते इस कारोबार को बढ़ाने के लिए ही बिजली में कटौती करवाना शुरू की है । पश्चिम का तो बिजली की वजह से बुरा हाल है और इन पंखो की डिमांड भी काफ़ी बढ़ गयी है ।

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