आचार्य पं. श्रीकान्त पटैरिया (ज्योतिष विशेषज्ञ) छतरपुर मध्यप्रदेश, किसी भी प्रकार की समस्या समाधान के लिए सम्पर्क कर सकते हो, सम्पर्क सूत्र:- 9131366453
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जन्म उत्तराखंड के गढ़वाल में 5 जून, 1972 को हुआ था। जन्म समय दोपहर 12 बजे उनकी कुंडली सिंह लग्न की है और लग्नेश सूर्य पूर्ण दिगबली होकर दशम भाव यानी कर्म स्थान में विराजमान में हैं। जहां सूर्य, सप्तमेश शनि के साथ पाराशरी राजयोग का निर्माण कर रहे हैं। हालांकि सूर्य की शनि के साथ स्थिति अच्छी नहीं मानी जाती, इसीलिए इस योग के चलते उनके जीवन में पारिवारिक और दाम्पत्य सुख का अभाव रहा।

कुडंली में बन रहे हैं कई अहम योग
इसके अलावा, कर्म स्थान में सूर्य के साथ धन और लाभ भाव के स्वामी बुध बुधादित्य योग का निर्माण कर रहे हैं। यहां दशमेश शुक्र और एकादशेश बुध बेहतरीन परिवर्तन राजयोग का निर्माण भी कर रहे हैं। यही कारण है कि संघर्ष के बावजूद योगी आदित्यनाथ की प्रतिष्ठा और सम्मान में निरंतर वृद्धि होती रही है।

अपराधियों पर जारी रहेगी सख्ती
वर्तमान में उनकी केतु में राहु की अंतर्दशा चल रही है, जो जनवरी, 2020 में शुरू हुई थी और फरवरी, 2021 तक चलेगी। कुंडली में राहु छठे भाव में मकर राशि में मजबूत होकर विराजमान हैं। छठे भाव में राहु अपराधियों पर शासन यानी उन्हें दबाकर रखता है। यही वजह है कि केतु में राहु की अंतर्दशा के दौरान, उत्तर प्रदेश में अपराधियों पर सख्ती, एनकाउंटर और उनकी संपत्तियों की नीलामी जैसी घटनाएं देखने को मिलीं। कुल मिलाकर, अपराधियों के प्रति उनकी सख्ती आगे भी जारी रहेगी,

कई फैसलों को लेकर हो सकता है विवाद:-

केतु में बृहस्पति की अंतर्दशा फरवरी, 2021 से जनवरी, 2022 तक चलेगी। बृहस्पतिकुंडली में अपनी ही धनु राशि यानी पंचम भाव में है, जो सत्ता और अधिकार का भाव भी है। हालांकि, बृहस्पति वक्री स्थिति में हैं, इसलिए उनके कई फैसले नए विवाद छेड़ सकते हैं। इस दौरान विपक्षी दल भी उनकी परेशानी बढ़ाने में कोई कसर नहीं चढ़ेंगे।

शनि-बृहस्पति का गोचर:-

2021 में शनि और बृहस्पति का गोचर वर्ष के ज्यादातर हिस्से में योगी आदित्यनाथ की कुंडली के छठे भाव में रहेगा। स्पष्ट है कि अपने विरोधियों को शांत करने केलिए इस साल उन्हें खासी मेहनत करनी पड़ेगी। हालांकि, अप्रैल से सितंबर में सप्तम भाव में गोचर के दौरान वह महिलाओं, गरीबों और वंचित तबकों के हित में कई अहम फैसले ले सकते हैं, जो उनकी प्रतिष्ठा को बढ़ाने में सहायक होंगे। स्पष्ट है, कि वर्ष 2021 में संघर्ष के साथ वह आगे बढ़ेंगे।

क्या कहती हैं सीएम योगी की कुंडली?

राजनीति और अध्यात्म दो अलग बिंदु है और इन दोनों में योगी आदित्यनाथ को महारत और लोकप्रियता हासिल है। वो गोरखनाथ मठ के मठाधीश के साथ राजनीति में भी अव्वल है। ये सब दोनों क्षेत्र में राजा जैसी स्थिति , उच्च पद और लोकप्रियता योगी की कुंडली में ग्रहों के अच्छे युग्म का प्रतिफल है।

ऐसी है सीएम योगी की कुंडली:-

योगी आदित्यनाथ की कुंडली में सिंह लग्न सूर्य है और राशि स्वामी शनि के साथ केंद्र में है। योगी की चंद्र राशि कुंभ और नक्षत्र जन्म पूर्व भाद्रपद नक्षत्र के दूसरे चरण में हुआ है। इन पर वर्तमान में केतु की महादशा व अंतरदशा चल रही है।
इनकी कुंडली में गुरु और चंद्रमा की युति योगी की प्रसिद्धि का कारक है। इसी कारण देश और राज्य की राजनीति में योगी का ओहदा गुरु व चंद्रमा की युति से से उच्च रहेगा। साथ में मंगल के कारण शत्रु भी प्रबल रहेंगे,लेकिन कुंडली में ग्रहों का अच्छी स्थिति की वजह से सितारे बुलंद रहेंगे।
सीएम योगी वर्तमान में यूपी के सीएम है और उनकी कुंडली भी ऐसी है कि राजनीति में उनका सफर अभी जारी रहेगा। जिसे योगी ने छात्र जीवन से शुरू किया था। योगी अदित्यनाथ आगे सीएम पद पर बने रहेंगे या पीएम पद पर भी आसीन होंगे। इस पर उनकी कुंडली का विश्लेषण किया गया है।
भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर इन्होंने अपना पहला चुनाव अपने आध्यात्मिक गुरु और गोरखनाथ पीठ के महंत अवैद्यनाथ की सीट यानि गोरखपुर से लड़ा और विजय प्राप्त की और फिर इसके बाद इन्होंने कभी भी पराजय का सामना नहीं किया और लगातार 05 बार संसद का चुनाव जीते। असल में देखा जाये तो योगी आदित्यनाथ की कुंडली में ही राज व संन्यास के योग दिखाई देते हैं। इनके ग्रहों की दशा कुछ ऐसी है कि ये सत्ता के पिछे नहीं बल्कि सत्ता इनका पीछे-पीछे चलती हुई दिखाई देती है।

यूपी के सीएम योगी की कुंडली सिंह लग्न की है। सिंह अर्थात शेर, इसलिए ऐसे कुंडली वाले व्यक्ति के चेहरे हमेशा तेज और चमक रहती है और ऐसे जातक उच्च पद पर आसीन रहते हैं। समाज में मान-सम्मान और साथ में आलोचना अपयश के भी शिकार होते हैं। योगी की जन्मराशि कुंभ है और उसका स्वामी शनि है। जो अपने मित्र शुक्र के घर पिता सूर्य और बुध के साथ केंद्र में बैठा है। तीन ग्रह एक साथ केंद्र में होने पर व्यक्ति हर तरह के लोगों के संपर्क में आता है।
साथ ही गुरु के बलवान होने के कारण इस कुंडली वाले जातक को समाज में मान-सम्मान दोनों मिलता है, ऐसा जातक पुजनीय होता है। सूर्य केद्र में होने से व्यक्ति राजा सी जिंदगी या कहे राजा का प्रिय होता है। जैसे योगी को हर क्षेत्र में अपने से उच्चस्थ का सानिध्य और सम्मन मिलता रहता है। उदाहरण के तौर पर योगी पीएम मोदी के टॉप लिस्ट में आते हैं।

क्या पीएम बनेंगे सीएम योगी:-

सीएम योगी की कुंडली मे शुक्र की महादशा और शनि की अंतरदशा चल रही है। शनि कुंडली में सूर्य के साथ केंद्र में तो है, इस कारण सीएम बनने संभावना है, लेकिन पीएम या कहे प्रधानमंत्री बनने की अभी संभावना नही है। लेकिन कुंडली में ग्रहों का प्रबल योग सीएम योगी को केंद्र में उच्च पद पर और मुख्य भूमिका में लेकर आएगा, इसकी पूरी संभावना है।

योगी आदित्यनाथ जी का सिंह लग्न, कुम्भ राशि है। लग्न मे सिंह राशि का होना योगी आदित्यनाथ जी को शेर के समान निडर और तेज़ तर्रार राजनेता बना रहा है कुम्भ राशि का चन्द्र न्यायशील राजनेता बनता है बुधादित्य योग इनको अच्छा वक्ता ज्ञानी बना रहा है

योगी को 2022 में राजनीतिक सफलता के योग:-

लग्नेश सूर्य दशम भाव में धनेश लाभेश बुध के साथ बुधादित्य योग तथा षष्ठेश सप्तमेश शनि के साथ दशम में एक और योग बना रहा है। इसी योग के कारण ये अपना घर-बार, जन्म स्थान को छोड़कर गोरखनाथ पीठ के महंत बने तथा वहां के कई करोड़ धन संपत्ति के संरक्षक है इनमें बड़े-बड़े निर्णय लेने की क्षमता है। इनकी कथनी और करनी में अंतर नहीं है। ये एक स्पष्टवादी संत हैं। धनेश लाभेश बुध सूर्य के साथ नयी भूमि भवन का सृजन करता है सुखेश का एकादशभाव में होना बहुत बड़ी फ्रेंड फॉलोइंग देखता है सुख भाव जनता का भाव है ये योग योगी आदित्यनाथ को जनता चहेता नेता बनाता है इनको जनता का बड़ा समर्थन और प्रसिद्धि दे रहा है जो चुनाव के समय वोट में बदल कर लाभ दिलवाती है
पराक्रमेश राज्येश शुभलाभ में भाग्येश सुखेश शुक्र मंगल के साथ दो राजयोग का सृजन कर रहा है ये योग पंचमेश गुरु से दृष्ट है दशम भाव और एकादश भाव में राशि परिवर्तन है शुक्र बुध के बीच इसपर और दशम भाव पर गुरु का प्रभाव है इसी राजयोग के क गोरखपुर से पांच बार सांसद और फिर उत्तरप्रदेश जैसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री बने, यह बहुत बड़ी बात है। पंचमेश अष्टमेश बृहस्पति और राज्येश पराक्रमेश शुक्र भी एक और राजयोग का सृजन कर रहा है
छठे स्थान का राहु व्यय का केतु राजयोग कारक बन गया है। सुख भाव का एकादश भाव में गुरु से दृष्ट होना व्यक्ति को नई सफलता देता है। व्यक्ति की लोकप्रियता दिन प्रतिदिन बढ़ती ही रहती है छठे स्थान पर मंगल की ओर केतु की दृष्टि विरोधियों और अपराधियों का अंत करने में सक्षम है यही योग इनको कड़क प्रशासक और नेता बनाता है इसी योग के कारण पिछले 04 सालो में उत्तरप्रदेश में अपराधियों के लगातार एनकाउंटर हुए , कानून का शिकंजा कसा और उत्तर प्रदेश कई नए कार्य किए,
स्वराशि पंचमेश गुरु इनको ज्ञानी बनाता है गुरु धर्म का कारक है यहां ब्रहस्पति इनको धर्म से जुड़ाव दे रहा है ये अष्टमेश भी है जो इनको धर्म , मठ , से जोड़ रहा और मठ प्रमुख बनने में योगदान दे रहा

सीएम योगी की कुंडली:-

प्रश्न:- क्या योगी जी 2022 में दुबारा उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे या केंद्र में इनको कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी?

उत्तर:- 2022 अप्रैल मई में उत्तर प्रदेश के चुनाव होंगे और रिजल्ट आयगा उस समय इनका , केतु शनि बुध का समय चल रहा होगा यहां ओर शनि बुध दोनों राजयोग कारक है यहां योगी जी का सामना अखिलेश यादव और मायावती कर पाए ऐसी संभावना बहुत कम है अत: योगी आदित्यनाथ जी एक बार फिर उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री बनते दिखाई देंगे

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