आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा में मॉकड्रिल के दौरान 22 मरीजों की कथित मौत का मामला तूल पकड़ चुका है। पारस अस्पताल में 26 अप्रैल को कोरोना संक्रमित मरीजों के मारे जाने की घटना को बयान करते डॉक्टर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस घटना पर नेता से लेकर आम जनता तक में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। इस कारण ट्विटर पर #Agra टॉप ट्रेंड में है।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी की यूपी महासचिव प्रियंका गांधी ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है। हालांकि, अब अस्पताल और जिला प्रशासन की तरफ से सफाई दी जा रही है कि मॉक ड्रिल में 22 नहीं, कम मरीजों की मौत हुई थी। लेकिन, सवाल यह है कि क्या ऑक्सिजन की कमी के कारण मरीजों के साथ मॉक ड्रिल करना ही अमानवीय नहीं है?

ऑक्सिजन मॉक ड्रिल के दौरान 22 मरीजों की मौत का मामले में सरकार ने जांच बिठा दी है। योगी सरकार ने ये फैसला अस्पताल के मालिक की आडियो क्लिप सामने आने के बाद लिया है। आगरा प्रशासन का कहना है कि जांच के बाद कठोर कार्रवाई की जाएगी।

आगरा के पारस अस्पताल के मालिक अरिंजय जैन को वायरल ऑडियो में जो कुछ कहते सुना जा रहा वो हैरत में डालने वाला है। ये क्लिप 28 अप्रैल की है, जब यहां कोरोना संक्रमितों की काफी तादाद थी। वायरल ऑडियो में जैन को ये कहते हुए सुना जा सकता है कि उसने अपने अस्पताल में ऑक्सिजन 5 मिनट के लिए बंद कर एक मॉक ड्रिल की थी। इस ड्रिल के बाद 22 मरीजों की जान चली गई। आडियो में जैन कहते सुना जा रहा है कि 5 मिनट की मॉक ड्रिल से 22 मरीज छंट गए। अस्पताल में केवल 74 मरीज ही बचे।

1.5 मिनट की आडियो क्लिप में अरिंजय जैन को कहते सुना जा सकता है कि मौजूदा समय में सीएम भी ऑक्सिजन नहीं दिलवा सकते। मोदी नगर पूरी तरह से ड्राई है। जैन के मुताबिक- मरीजों के परिवारों की काउंसलिंग की गई तो कुछ लोग उनकी बात सुनने को तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि वो अस्पताल से नहीं जाएंगे। उसके बाद मॉक ड्रिल शुरू कराई गई। ये सुबह 7 बजे किया गया।

अस्पताल के संचालक का कहना है कि मॉक ड्रिल इसलिए की गई थी ताकि गंभीर मरीजों की पहचान की जा सके और किस मरीज को कितनी ऑक्सिजन की जरूरत है इस बात की पहचान की गई। उनका कहना है कि 5 मिनट की कवायद में कई मरीजों के शरीर नीले पड़ गए थे। आडियो में एक और व्यक्ति की भी आवाज है जो जैन की हां में हां मिलाता दिख रहा है। इसके वायरल होने के बाद से यूपी सरकार के गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। हालांकि, सरकार अभी भी 22 मरीजों की मौत उस दिन होने से इनकार कर रही है।

जिले के डीएम प्रभु एन सिंह भी ऑक्सिजन बंद होने की वजह से 22 लोगों की मौत की बात से इनकार कर रहे हैं। डीएम के मुताबिक-इस अस्पताल में 26 अप्रैल को 4 और 27 अप्रैल 3 लोगों की मौत हुई थी। लेकिन सरकार ने वीडियो को गंभीर मानते हुए जांच के आदेश दे दिए गए हैं। उनका कहना है कि ऑक्सिजन की कमी से हालात बिगड़े थे लेकिन उसको 48 घंटे के भीतर दूर कर लिया गया था।

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