मोहम्मद जाहिद
किसी देश के लोग जैसे होते हैं , खुदा वैसा ही हुक्मरान उसके उपर मुसल्लत कर देता है। अच्छे लोगों के ऊपर अच्छा नेक हुक्मरान और गंदे गलीच लोगों वाले “सड़े हुए समाज” के ऊपर ज़ालिम हुक्मरान।
यह हम सभी मुसलमान बचपन से सुनते आए हैं , पर आज देश के हालात देखकर यह बिल्कुल सच बिल्कुल सच होता जा रहा है और देश के मुसलमानों को देख कर तक 101% सच होता सिद्ध हो रहा है।
एक लड़की ने 4 दिन पहले कुछ पोस्ट करके पूछ लिया कि 1- “इस्लाम में कैसे कपड़े पहनने की इजाज़त है ?” , 2- “अगर लड़की कपड़े ऐसे पहनती है जिससे उसका जिस्म ढक जाता है तो नकाब से पर्दा करने की क्या ज़रूरत ?”
मैं चार दिन से यह देख कर हैरान हूँ कि एक भी “मुसल्लम ईमान” वाला उसके सवालों का जवाब ना देकर उसके साथ बत्तीमीजी कर रहा है।
कोई उसके गंदे मीम बना रहा है , कोई उसकी वीडियो के साथ छेड़छाड़ करके अश्लील बात कर रहा है तो कोई उसकी फेक आईडी उसके फोटो के साथ बनाकर गंदे अश्लील चैट और कमेन्ट कर रहा है।
वाह रे मुसल्लम इमान वालों ? थोड़ी तो शर्म कर लो।
और ज़रा सोचो कि यही सवाल तुमसे तुम्हारी अपनी बहन और बेटी ने पूछा होता तो क्या तुम ऐसा ही करते ? वाकई वह दिन दूर नहीं कि ऐसा होने लगेगा।
आपके पास उसके दो सवालों का जवाब नहीं तो उसकी इज्जत सोशलमीडिया पर उछाल दो ? यही तुम्हारा ईमान कहता है ? लानत है तुम सब ऐसा करने वालों पर , थू है।
सच तो यह है कि तुम्हारे पास उसके सीधे सवालों का जवाब नहीं।
आईए समझते हैं कि उस लड़की के सवाल का जवाब क्या था ।
1-इस्लाम में कैसे कपड़े पहनने की इजाज़त है ?
दरअसल इस्लाम में परदे का कांन्सेप्ट बहुत व्यापक है , इतना व्यापक कि इसके दायरे में धीरे धीरे हर धर्म के लोगों के दरवाज़ों पर परदा टंगने लगा है , इंग्लिश शब्द प्राईवेसी या हिन्दी शब्द “निजता” परदे के कांसेप्ट का ही एक मामूली सा हिस्सा है , इस्लाम में केवल परदे के कांसेप्ट पर हज़ारों किताबें लिखी जा चुकी हैं , 1000 और किताब लिखी जा सकती हैं। इस पर फिर कभी पोस्ट करूँगा।
फिलहाल आईए उस लड़की के सवाल पर आते हैं।
इस्लाम में औरत के लिए परदा है तो मर्द के लिए भी परदा है। मर्द के लिए परदा यह है कि वह जैसे ही किसी गैर महरम (सगी बहन बेटी और माँ के अतिरिक्त) किसी भी औरत को देखे , वह अपनी नज़र नीची कर ले।
इस्लाम में औरत के लिए इसके साथ साथ जिस्म का भी परदा है , इस्लाम में आपको परदा मिलेगा , यह कांसेप्ट औरतों के जिस्म को ढकने के लिए पूरी दुनिया के लिए है पर अलग अलग जगहों पर अलग अलग तरह से लोग अपनी संस्कृति और पहनावे के हिसाब से परदा करते हैं , जैसे भारतीय उपमहाद्वीप में औरतें कपड़े के ऊपर नकाब पहनती हैं , तो अरब मुल्कों में औरतें गाऊन पहनती हैं , तो अन्य जगहों पर हिजाब भी पहना जाता है।
यह सब परदा के लिए ही पहना जाता है , इस्लाम में ऐसे किसी पहनावे का जिक्र ना करके सिर्फ जिस्म के परदे का हुक्म है।
औरतों के लिए ऐसा अलग इसलिए है क्युँकि उसके जिस्म की बनावट और ऊभार छुप जाए , यहाँ तक कि किसी मोहतरमा की लाश भी इस तरह से परदे में दफनाने का हुक्म है कि जनाजे में मौजूद गैर मर्द उस मोहतरमा की बाॅडी की बनावट का अंदाज़ा भी ना लगा सकें।
कहने का अर्थ यह है कि औरतों को अपने जिस्म के हर उभार पर परदा डालने का हुक्म है , बस वह छुपना चाहिए , इसके लिए अपनी संस्कृत और परंपरा के अनुसार महिलाएँ ढीला ढाला वस्त्र पहनती हैं। जो नकाब , गाऊन , या हिजाब लिए चादर भी हो सकती है।
ऐसा क्युँ ? वह आखीर में बताऊँगा , अब दूसरा सवाल।
2- “अगर लड़की कपड़े ऐसे पहनती है जिससे उसका जिस्म ढक जाता है तो नकाब से पर्दा करने की क्या ज़रूरत ?”
जवाब है , बिल्कुल नकाब की जरूरत नहीं , लड़की का लिबास यदि परदे के कांसेप्ट को पूरा कर रहा है तो दूसरे लिबास अर्थात नकाब की कोई ज़रूरत नहीं।
मगर ठहरिए
अमूमन , बदलते वक्त में और फैशन के चलन में अब ढीला ढाला परदे का कांसेप्ट पूरा करता लिबास पहनना संभव नहीं। पार्टी शादी ब्याह में सब कुछ फिटिंग का ही चलता है और यह यदि महिलाएँ , महिलाओं के बीच में पहनती हैं तो घर से बाहर के लिए एक ऊपरी पहनावे की ज़रूरत पड़ती है। जिससे उसके जिस्म के ऊभार छिप जाएँ।
अब सबसे महत्वपुर्ण सवाल है कि क्युँ छिप जाएँ ?
इस सवाल को मैंने बहुत ढूढने की कोशिश की , मगर मुझे अभी चंद साल पहले इसका जवाब मेरे एक बेहद करीबी मित्र जो इलाहाबाद के सबसे बड़े यौन रोग विशेषज्ञ हैं उन्होंने दिया।
उनके अनुसार सेक्स शारीरिक नहीं मानसिक क्रिया है। इंसान के मस्तिष्क के अंदर क्या चल रहा होता है यह उस समय सेक्स के समय को निर्धारित करता है।
मेरे मित्र के अनुसार , उसके पास ऐसे बहुत से मरीज आते हैं जो हम बिस्तरी के समय माधुरी से लेकर ऐश्वर्य राय और दीपिका पादुकोण से लेकर आलिया भट्ट तक को ख्यालो में सजो कर अपनी पत्नी से हमबिस्तरी करते हैं , वह यह महसूस करते हैं कि वह उनके साथ सेक्स कर रहे हैं और इसी उत्तेजना में वह जल्दी स्खलित हो जाते हैं और दवा लेने आते हैं।
तब मुझे औरतों के ढीले ढाले परदे की अहमियत का एहसास हुआ कि कोई भी हमारी माँ बहन बेटी , उसके जिस्म का कोई भी ऊभार , बेपरदगी की वजह से किसी गैर के ऐसे वक्त में खयालों में ना आए जैसे माधुरी दीक्षित , ऐश्वर्या राय या आलिया भट्ट और दीपिका पादुकोण आती हैं।
परदे और जिस्म के ऊभार को ढकने की यह है वजह। क्युँकि मर्द जात कुत्ते की नजर रखता है।
उम्मीद है उस बहन को भी जवाब मिल गया होगा।
तो गालीबाजों पहले अपने धर्म को समझो , इसके बताई व्यवस्था की बारीकियाँ समझों और फिर कोई सवाल करे तो जवाब दो।।।
तहज़ीब के साथ , हद में रह कर।

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