इब्न ए आदम
जब सोनिया गांधी ने कांग्रेस की कमान सम्भाली तो जितेंद्र प्रसाद ने उनका विरोध किया , उनके ख़िलाफ़ कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ा । वो कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव हार गए और सोनिया गांधी ने उन्हें अपना उपाध्यक्ष बना दिया । सोनिया गांधी ने जितेंद्र प्रसाद के जीते जी कभी उनकी उपेक्षा नहीं की ।
जितेंद्र प्रसाद की मौत के बाद उनके बेटे जितिन प्रसाद राजनीति में आए , 30 साल की उम्र में उन्हें शाहजहाँपुर से कांग्रेस का टिकट मिला और वो सांसद बन गए । 35 साल की उम्र में उन्हें मनमोहन सिंह जी की सरकार में मंत्रालय मिल गया ।
2014 और 2019 का लोकसभा चुनाव वो हार गए । उत्तर प्रदेश में सभी कांग्रेसी चुनाव हार गए इसलिए हार पर तो उन्हें दोष देना सही नहीं होगा लेकिन जिस पार्टी ने उन्हें , उनके पिता और उनके दादा को इतना सम्मान दिया है , उस पार्टी को ऐसे समय में छोड़ने का मतलब तो यही है कि जितिन प्रसाद जैसे लोग सिर्फ़ सत्ता के लिए राजनीति करते है ।
जितिन प्रसाद 2014 से लगातार भाजपा में जाने की जुगत में लगे हैं , ब्राह्मण वोटर की नाराज़गी से भयभीत भाजपा ने उनके मन की मुराद आज पूरी कर दी ।

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