इब्न ए आदम
मनमोहन सिंह जी की सरकार में 22 दिसंबर 2011 को भोजन के अधिकार का बिल संसद से पास हुआ जिसके तहत देश की 2/3 आबादी ( लगभग 90 करोड़ जनता ) को तीन रुपय किलो चावल और दो रुपय किलो गेन्हु मिलते थे ।
2011 में ना कोई महामारी थी , ना किसी का रोज़गार गया था फिर भी मनमोहन सिंह जी की सरकार ने देश के ग़रीबों और निम्न मध्यम वर्ग के लिए यह योजना लागू की थी । भाजपा के मुरली मनोहर जोशी सहित कई सांसदो ने बिल के ख़िलाफ़ भाषण दिए थे । बड़े बड़े तथाकथित अर्थशास्त्री इस बिल को अर्थव्यवस्था का विरोधी बता रहे थे लेकिन इसके बाद भी UPA सरकार ने बिना किसी ताम झाम और शोर शराबें के बिल पास करवा लिया । मनमोहन सिंह ने टीवी पर आकर देश की जनता पर इसका एहसान भी नहीं लादा ।
मोदी जी हर तीसरे महीने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत पाँच किलो गेन्हु या चावल देने का ऐसा ढिंढोरा पीटते हैं जैसे दानवीर कर्ण के बाद सबसे बड़ा दान यही कर रहे हैं । जबकि नैशनल फ़ूड सिक्योरिटी ऐक्ट लागू होने की वजह से मोदी जी से गेन्हु लेने वाले को हर महीने दस रुपय का और चावल लेने वाले को हर महीने सिर्फ़ 15 रुपय का फ़ायदा हो रहा है ।
एक महीने में एक व्यक्ति को 10 या 15 रुपय का फ़ायदा पहुँचाकर मोदी जी , मीडिया , मोदी सरकार के मंत्री , आईटी सेल देश के ग़रीब पर रात दिन एहसान लाद रहे हैं ।
मनमोहन सिंह ने जिसे अधिकार बनाया था , मोदी जी उसे एहसान जताकर दे रहे हैं । अधिकार और एहसान का फ़र्क़ तो समझते ही हैं ना आप लोग ??

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