सौमित्र रॉय
मुझे बड़ी हंसी आती है, जब लोग मुझसे पूछते हैं कि पेट्रोल-डीजल से लाखों करोड़ कमाने वाली मोदी सरकार भिखमंगी जैसी क्यों घूमती है? सूरत गए हैं कभी आप। जाइए। पता चलेगा कि हीरा नगरी के कारोबारी किन सादे लिबास में रहते हैं। बिना इस्त्री की हुई कमीज़ और चप्पल पहने व्यक्ति करोड़ों में ज़ुबानी डील कर लेता है।
अडाणी-अम्बानी को आपने यूं फटेहाल नहीं देखा होगा, क्योंकि वे कंपनी चलाते हैं। उनकी ग्लोबल इमेज है। मोदी लाखों के सूट पहनता है, क्योंकि वह पीएम है। हालांकि टैक्स चोरी में सारे उस्ताद होते हैं। इंडियन एक्सप्रेस की खबर है कि अडाणी ग्लोबल PTE के बैंक खाते में 2009 से 2014 के बीच 14.46 मिलियन डॉलर कालाधन जमा हुआ।
ये पैसा फ़र्ज़ी शेल कंपनियों से सेशेल्स जैसे टैक्स हैवन देशों के मार्फत गया। इतना जानकर आप कहेंगे कि तब तो UPA सरकार थी। लेकिन यह भी याद रखें कि उसी UPA सरकारों के 10 साल में मल्टीनेशनल कंपनियों से टैक्स वसूलने में सबसे ज़्यादा सख़्ती की गई।
जबकि वह दौर दुनियाभर में टैक्स चोरी कर शेल कंपनियों के जरिये विदेशी बैंकों में काला धन जमा करने का भी था। मनमोहन सरकार की यही सख़्ती मल्टीनेशनल कंपनियों को नाराज़ कर गयी और उन्होंने बीजेपी और मोदी पर दांव खेला।
यह भी न भूलें कि अडाणी ग्लोबल के खाते में कालाधन उस वक़्त आया, जब मोदी गुजरात के सीएम थे। मोदी ने भारत के लोगों से कालाधन वापस लाने और सबके खाते में 15 लाख जमा करने का वादा किया था, जिसे अमित शाह ने बेशर्मी से जुमला बताया था।
मोदी आज तक कालाधन वापस नहीं ला सका। अब आलम यह है कि कालेधन का बड़ा हिस्सा बीजेपी के फण्ड में डालो, लोन खाओ और बिना डकार लिए विदेश भाग लो। चौकीदार कुछ नहीं कहेगा।
यह सब न तो वह गोदी मीडिया बताएगा, जिसका बाप अम्बानी है और न उनके दलाल पत्रकार। आप लोग भी पढ़ने, समझने के बजाय व्हाट्सएप में घुसे रहते हैं। तो यूं ही लुटते रहिए।

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