बट सावित्री व्रत पूजन करती महिलाएं

शिवाकांत अवस्थी

महराजगंज/रायबरेली: कस्बा सहित क्षेत्र के मऊ, सिकंदरपुर, अन्दूपुर, मोन, डेपर मऊ, बावन बुजुर्ग बल्ला, हलोर, अतरेहटा आदि गांवों में सुहागिन महिलाओं ने वट सावित्री की पूजा अर्चना कर पति की लंबी उम्र और सुख शांति की कामना की। वहीं नव विवाहिताओं में वट सावित्री पूजा को लेकर खासा उत्साह दिखाई दिया। वट वृक्ष को आम, केला, अनार, लीची आदि मौसमी फल अर्पित करके, कच्चे सूत से बांधने और ब्याना (हाथ पंखा) से ठंडक पहुंचाने के बाद महिलाओं ने आस्था के साथ वटवृक्ष की परिक्रमा की और पूजा के बाद वट सावित्री कथा भी सुनी।

अपने पति की दीर्घायु और सुख समृद्धि के लिए वट वृक्ष की पूजा करती महिलाएं।

    आपको बता दें कि, जेष्ठ मास की अमावस्या के दिन पड़ने वाले इस पर्व में सुहागिन महिलाओं ने पूजा की थाली सजाकर वट वृक्ष की परिक्रमा की, और फल फूल चढाकर सुख समृद्घि और पति की लंबी आयु की कामना की। इस व्रत का विशेष महत्व है, जबकि घरों में नई-नवेली दुल्हनो के साथ सुहागिन महिलाएं बरगद पेड़ के नीचे पहुंच कर पूरे दिन पूजा-अर्चना करती रही।

    इसी क्रम में कस्बे की रहने वाली समाज सेविका अनुपमा पांडेय, लवली श्रीवास्तव, भाजपा नेत्री सुधा अवस्थी, गरिमा सिंह, रंजना तिवारी, शक्ति रस्तोगी ने जहां बट वृक्ष के नीचे जाकर पूजा की, तो वहीं मऊ गर्बी गांव की रहने वाली कांती अवस्थी, सरिता अवस्थी, सोनी अवस्थी ने भी अपने पति की लंबी आयु और सुख समृद्धि के लिए वट वृक्ष के नीचे पहुंचकर पूजा की। इसके अलावा मऊ सर्की गांव निवासी पूर्व प्रधान नीलम सिंह समेत बड़ी संख्या में महिलाओं और नवविवाहिताओं ने आस्था के साथ वटवृक्ष की परिक्रमा कर पूजा के बाद वट सावित्री कथा भी सुनी।

   वट सावित्री पूजन करना फलदायक: महराजगंज कस्बे की रहने वाली अनुपमा पांडेय कहती हैं कि, इस व्रत को सबसे पहले सावित्री ने किया, वह अपने पति सत्यवान के प्राण को यमराज से वापस मांगकर लाई थीं, तब से इस व्रत को सुहागिन करती चली आ रही है। वट सावित्री व्रत में महिलाएं 108 बार बरगद की परिक्रमा करती हैं।

    मऊ गर्बी गांव की रहने वाली कांती अवस्थी बताती हैं कि, वट सावित्री पूजन करना बेहद फलदायक होता है। इस दिन महिलाएं सुबह स्नान करने के बाद सुहाग से जुडा हर श्रृंगार करती हैं। तब तक पानी नहीं पीती हैं, जब तक वह पूजा नहीं कर लेती हैं। वट सवित्री के दिन महिलाएं त्यौहार की तरह अपने अपने घरों में नए-नए व्यंजनों के साथ पकवान भी बनाती हैं। वट वृक्ष पूजन में साल भर के जो 12 महिने होते है। उसके अनुसार सभी वस्तुएं भी 12 ही चढाई जाती हैं। कच्चे धागे का जनेऊ बनाकर उसको अपने गले में धारण करती है।

   मऊ गांव की पूर्व प्रधान नीलम सिंह बताती है कि, ज्येष्ठ माह की कृष्ण अमावस्या को वट सावित्री का व्रत रखा जाता है। हम सभी महिलाएं ये व्रत पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य व परिवार की उन्नति के लिए रखती हैं। इस दिन वट वृक्ष की पूजा करना श्रेयस्कर माना जाता है।

     लवली श्रीवास्तव बताती हैं कि, हिंदू शास्त्रों में वट वृक्ष को देव वृक्ष माना जाता है। इसमें ब्रह्मा, विष्णु, महेश का वास माना गया है। देवी सावित्री ने अपने पति को इसी वृक्ष के नीचे पुन: जीवित किया था। तभी से इस दिन वट सावित्री का व्रत हम महिलाओं द्वारा रखा जाता है। 

   मोन गांव के रहने वाले पंडित शारदा शरण पांडेय ने बताया कि, महिलाएं सुबह स्नान कर बांस की टोकरी में सप्त धान्य रखकर ब्रह्मा व सावित्री की मूर्ति की स्थापना तथा दूसरी टोकरी में सत्यवान व सावित्री की मूर्तियों की स्थापना करती है। फिर यह टोकरियां वट वृक्ष के नीचे रखकर वृक्ष की जड़ में जल देते हुए सावित्री व सत्यवान की पूजा करती है। पूजा में जल, मौली, रोली, कच्चा सूत, भीगा चना, फूल व धूप चढ़ाती है। वटवृक्ष के तने पर कम से कम सात बार परिक्रमा कर कच्चा सूत लपेटने से पूजा का संपूर्ण फल मिलता है। 

  उन्होंने यह भी बताया कि, इस व्रत के समय महिलाएं सत्यवान और सावित्री के अटूट संबंध की कथा सुनती और सुनाती हैं। इस बार कोरोना संक्रमण के कारण कई जगहों पर पहले की तरह भीड़ तो नहीं दिखी, लेकिन महिलाओं ने उत्साह के साथ पूजा अर्चना की है।



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