फरीदाबाद। हरियाणा के जिला फरीदाबाद के गांव खोरी के हजारों लोग अब बेघर हो जायेंगे क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने 10 हजार मकानों को गिराने के आदेश जारी कर दिए हैं। वन क्षेत्र की जमीन पर अतिक्रमण करने वाले निवासियों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। कुछ समय पहले देश की सर्वोच्च अदालत ने फरीदाबाद नगर निगम को 6 सप्ताह के भीतर खोरी गांव में वन क्षेत्र पर बने तमाम अतिक्रमण को हटाने के निर्देश दिए थे। जिसके लिए फरीदाबाद के एसपी को नगर निगम के अधिकारियों को सभी सहायता और पुलिस सुरक्षा प्रदान करने के लिए कहा गया था।
नगर निगम प्रशासन ने गांव लकड़पुर और खोरी में मुनादी करवाकर लोगों को अपने मकान खाली करने को कहा। दोनों गांवों में नोटिस भी लगाए गए हैं। इसके साथ 11 जून को होने वाली भारी तोड़फोड़ के लिए डीसी यशपाल यादव ने तीन ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किए हैं। बड़खल के एसडीएम पंकज सेतिया, नगर निगम के ज्वाइंट कमिश्नर प्रशांत अटकान और निगम के सचिव नवदीप सिंह को तैनात किया है।
बताया गया है कि बुधवार सुबह भारी पुलिस बल के साथ नगर निगम अधिकारी बुलडोजरों के जरिए इन अवैध मकानों को गिरा देंगे। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश जारी कर छह सप्ताह के अंदर गांव लकड़पुर और खोरी स्थित अरावली वन क्षेत्र की जमीन पर बने 10 हजार अवैध मकानों को हटाने के आदेश जारी किए थे। इस कार्रवाई से इन गांवों में रह लोगों में हड़कंप मचा हुआ है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने यहां पर जमीन खरीदकर मकान बनाए हैं। यदि अदालत उन्हें हटाना चाहती है तो कम से कम उनके लिए वैकल्पिक जगह की व्यवस्था भी कराए। हालांकि इसके लिए सुप्रीम कोर्ट पहले ही मना कर चुका है। अदालत में भी इन लोगों ने इस तोड़फोड़ को रोकने की मांग की थी, जिसे अदालत ने सिरे से खारिज कर दिया।
बता दें कि अरावली वन क्षेत्र की जमीन को यहां रहने वाले कुछ लोगों ने अपनी जमीन बताकर उन लोगों को बेच दिया, जोकि यूपी, बिहार और अन्य राज्यों से फरीदाबाद-दिल्ली में मेहनत मजदूरी करने के लिए आए थे। इन लोगों ने माफियाओं के चंगुल में फंसकर यह जमीन खरीद ली और उस पर अपने मकान बना लिये। वैसे यहां पहले भी कई बार तोड़फोड़ हो चुकी है, लेकिन हर बार नगर निगम का दस्ता वापस चला जाता था।
दरअसल ये मकान अवैध रूप से जंगलों की जमीन पर बनाये गए हैं। फ़िलहाल खाली कराए जाने के लिए कल से शुरू होने वाली तोड़फोड़ को अभी रोक दिया गया है। पहले प्रशासन के द्वारा एक्शन प्लान तैयार किया जाएगा और उसके बाद लगातार तोड़फोड़ जारी रहेगी। जिला उपायुक्त यशपाल यादव ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना करने के लिए 6 हफ्ते के अंदर गांव में तोड़फोड़ की जाएगी, लेकिन उससे पहले एक्शन प्लान तैयार किया जाएगा।
प्रशासन के द्वारा खोरी गांव की मॉनिटरिंग की जाएगी और सभी विभागों के साथ चर्चा करने के बाद प्लान तैयार करके तोड़फोड़ को शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि लोगों को 2 दिन का समय क्षेत्र खाली कराने के लिए दिया गया है। जिला उपायुक्त के द्वारा अलग-अलग विभागों के अधिकारियों के साथ इसको लेकर बैठक की जा चुकी है और बैठक में किस तरह से पूरी तोड़फोड़ को अंजाम दिया जाना है। इसके लिए ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। जिला उपायुक्त ने बताया कि तोड़फोड़ के लिए बाकायदा भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती होगी, क्योंकि इस तोड़फोड़ में 10 हजार मकानों को तोड़ा जाएगा और फरीदाबाद में होने वाली ये अब तक की सबसे बड़ी तोड़फोड़ होगी, जो 6 हफ्ते तक चलेगी। ऐसे में किसी भी प्रकार से कानून व्यवस्था ना बिगड़े इसकी जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन के कंधों पर होगी।
प्रशासन के द्वारा खोरी गांव में रहने वाले लोगों को पहले ही सूचना दे दी गई है कि वो अपने मकानों को खाली कर दूसरे स्थानों पर चले जाएं, लेकिन ऐसे में लोग वहां पर अपने लिए वैकल्पिक स्थान की मांग कर रहे हैं। इससे पहले भी लोगों ने अदालत में अपने लिए वैकल्पिक मकान की मांग की थी, लेकिन अदालत के द्वारा उनकी इस मांग को खारिज कर दिया गया था।
खोरी गांव के वन क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को लेकर सरकार पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। कांग्रेस नेता विजय प्रताप ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय हरियाणा सरकार की गलत मंशा का नतीजा है। उन्होंने कहा कि हम जल्द ही खोरी गांव जाकर वहां के लोगों से मिलकर उनकी मदद के लिए कोई रणनीति बनाएंगे। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में गरीबों की पैरवी के लिए कोई काम नहीं किया।
कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार की गलत मंशा के कारण अब इन लोगों के घरों को तोड़ने की तैयारी की जा रही है। सरकार को सुप्रीम कोर्ट में कहना चाहिए था कि हम पुनर्वास योजना के तहत मकान बनाने को तैयार हैं और इसके लिए समय सीमा भी तय करनी चाहिए थी। सरकार को सुप्रीम कोर्ट में कहना चाहिए था कि जब तक इन लोगों का पुनर्वास ना हो जाए, तब तक इन लोगों को ना हटाया जाए। लेकिन सरकार ने ऐसा कुछ भी नहीं किया।
आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष धर्मबीर भड़ाना ने जिला प्रशासन एवं भाजपा सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।  उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी अलग-अलग तरीके से अमल में लाती है। जब सुप्रीम कोर्ट आदेश जारी करता है कि अरावली वन क्षेत्र में अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं होगा तो सरकार आंखें बंद कर लेती है। इस बीच अरावली वन क्षेत्र को जमकर उजाड़ा जाता है, लॉकडाउन में भी पहाड़ में जमकर पत्थर तोड़े गए, पेड़ काटे गए और अवैध फार्म हाउस बने।

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