सौमित्र रॉय
चुनाव नैरेटिव और परसेप्शन का खेल है। ओपी राजभर ने ट्वीट कर कह दिया कि यूपी में बीजेपी डूबती हुई नैया है। यही परसेप्शन बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व को डरा रहा है।
राजभर ने शिक्षक भर्ती में पिछड़ों को तवज्जो न देने का आरोप लगाकर फिलहाल तो यह नैरेटिव सेट कर दिया है कि महाराज ने बीते 4 साल में पिछड़ों को धोखा दिया और अब हार के डर से उनकी याद आ रही है। यही हाल अनुप्रिया पटेल के साथ भी हुआ। लेकिन केंद्रीय नेतृत्व उन्हें कैबिनेट में शामिल कर परसेप्शन बदलना चाहता है।
इसी तरह कल बीजेपी में शामिल हुए जितिन प्रसाद आने वाले कल अगर केंद्रीय मंत्री बन जाएं तो हैरत नहीं। बावज़ूद इसके यूपी के महाराज राज में चौतरफा कुप्रबंधन और अराजकता के बीच आम जनता का परसेप्शन सिर्फ़ इसी से नहीं बदलेगा।
अगर केंद्रीय नेतृत्व ने महाराज के बजाय 2017 में मनोज सिन्हा को सीएम बनाया होता तो आज हालात अलहदा होते। अब शायद देर हो चुकी है। फिर भी अगले 8 महीने यूपी ही भारत है।

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