कृष्णकांत
कोरोना चीन से आया है. महंगाई स्वदेसी है. मेक इन इंडिया. 35 रुपये का पेट्रोल 105 में बेचा जा रहा है. क्यों बेचा जा रहा है, पता नहीं. कुछ भक्तनुमा खरीदार बता रहे हैं कि उन्होंने प्रधानमंत्री चुनने की जगह शेर पाला है, इसलिए महंगा पेट्रोल खरीद रहे हैं.
कोरोना से बच जाओगे तो महंगाई मार देगी. कोरोना के कहर से परेशान जनता पर ये महंगाई थोपी गई है. हद से ज्यादा महंगाई व्यवस्था में मची लूट का परिणाम है.
पिछले एक साल में खाद्य तेल के दाम 50% बढ़े हैं. किराने के सामान 40% महंगे हो गए हैं. जो सरसों का तेल पिछले अप्रैल में 135 रुपये प्रति लीटर था, अब 185 में है. 80 रुपये की अरहर दाल 107 में हो गई है. चावल 7 फीसदी, साबुन 15 फीसदी, डिटर्जेंट 10 फीसदी और चीनी 5 फीसदी महंगी हो गई है.
पेट्रोल और डीजल के दाम अकेले नहीं बढ़ रहे हैं. वे रोटी भी महंगी कर रहे हैं. ये उस दौर में हो रहा है जब करीब 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे चले गए हैं और करोड़ों लोग बेरोजगार होकर घर बैठे हैं. भारत जैसे बड़े देश की अर्थव्यवस्था ऐसे ही नहीं तबाह होती. इसके लिए सालों तक 18-18 घंटे मेहनत करनी पड़ती है.

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