जींद। किसान आंदोलन को 6 महीने से अधिक समय हो गया है लेकिन किसान अभी भी न्याय के इंतजार में सारे मौसमी कष्ट झेल कर भी बैठे हैं। वे लोग घर पर जाते हैं, घरवालों का कुशल क्षेम लेकर फिर से धरने पर वापिस आ जाते हैं। घरवालों से हर रोज फोन पर बात कर टच में रहते हैं।

लेकिन 26 जनवरी की ट्रैक्टर परेड में शामिल होने के लिए गया जींद के गांव कंडेला का विजेंद्र आज तक वापिस नहीं लौटा है, न ही उसका फोन लग रहा है। विजेंद्र के बारे में किसी को भी कुछ पता नहीं है। बेटे के इंतजार में मां की आंखें पथरा गई हैं और दिल्ली की तरफ से आने वाले हर शख्स से विजेंद्र के बारे में पूछती हैं। स्वजनों ने विजेंद्र का पता लगाने वाले को 51 हजार रुपये देने की भी घोषणा की है।

कंडेला गांव के खजान सिंह की विधवा 60 वर्षीय संतोष के अनुसार उसका बेटा विजेंद्र 24 जनवरी को दिल्ली में किसान की ट्रैक्टर परेड में शामिल होने के लिए घर से गया था। उसके बाद से उसकी कोई खबर नहीं है। संतोष के 2 बेटे सुरेंद्र और विजेंद्र हैं। सुरेंद्र शादी-शुदा है, जबकि विजेंद्र की अभी शादी नहीं हुई है। संतोष का कहना है कि उसने बेटे विजेंद्र को दिल्ली के किसान आंदोलन की ट्रैक्टर परेड में भाग लेने के लिए रवाना किया था। तब उसने सोचा भी नहीं था कि वह अपने बेटे की दोबारा से शक्ल देखने तक को तरस जाएगी। साढ़े चार महीने से वह अपने बेटे के घर लौटने का इंतजार कर रही है।

संतोष के पास एक एकड़ से भी कम जमीन है। इसी जमीन पर संतोष के दोनों बेटे सुरेंद्र और विजेंद्र खेती कर किसी तरह अपना और परिवार का पेट पाल रहे हैं। बेटे के इस तरह गायब हो जाने के दर्द ने विधवा संतोष को अंदर से तोड़कर रख दिया है। बेटे विजेंद्र के बारे में बात करते संतोष पहले रो पड़ती थीं। लेकिन, अब उसकी आंखों के आंसू भी सूख गए हैं।

विजेंद्र के भाई सुरेंद्र ने बताया कि वह अपने भाई को ढूंढने के लिए साढ़े चार महीने से धक्के खा रहा है। अभी तक उसके भाई का कोई पता नहीं चल सका है। वह खुद दिल्ली में एक महीने तक उसके भाई को ढूंढने के लिए लगा चुका है। 26 जनवरी को गांव के कुछ लोगों के साथ उसके भाई को अंतिम बार देखा गया था। लेकिन उसके बाद उसके भाई को किसी ने नहीं देखा। अखबार से लेकर पर्चे छपवाकर भी वह जगह-जगह लगा चुके हैं। विजेंद्र को ढूंढने वाले को 51 हजार रुपये देने की घोषणा भी की है।

सर्व खाप पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष टेकराम कंडेला ने कहा कि कंडेला गांव का 20 वर्षीय विजेंद्र 24 जनवरी से लापता है। विजेंद्र की तलाश के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। वह जब भी खटकड़ टोल प्लाजा, टिकरी बार्डर जहां भी जाते हैं, वहां पर विजेंद्र की तलाश के लिए प्रयास करते हैं। किसान नेता राकेश टिकैत के सामने भी उन्होंने विजेंद्र के गुम होने का मामला उठाया था।

कंडेला गांव के खजान सिंह की 60 वर्षीय विधवा संतोष के जिस दर्द को अब तक किसी भी किसान नेता या राजनीतिक नेता ने नहीं समझा था, उसके दर्द और दुख को भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने समझा था। पिछले सप्ताह वीरवार को राकेश टिकैत जींद आए थे, तो संतोष से मिलने पहुंचे थे।राकेश टिकैत ने संतोष को आश्वासन दिया था कि उसके लापता हुए बेटे को ढूंढने का हर संभव प्रयास भारतीय किसान यूनियन करेगी।

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