आवेश तिवारी
योगी आदित्यनाथ ने शाह और मोदी के दबाव से आजिज आकर मोहन भागवत को फोन पर अपने इस्तीफे की पेशकश तक कर दी थी। गौरतलब है कि नरेन्द्र मोदी और शाह पूर्व आईएएस अरविंद शर्मा को विधान परिषद सदस्य बनाने के बाद उप मुख्यमंत्री बनाकर गृह, नियुक्ति जैसे अति महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील विभाग देने का दबाव बढ़ और योगी उसे टालते जा रहे थे।
अब जानकारी मिल रही है कि जब भाजपा के संगठन महासचिव बीएल संतोष और प्रभारी राधा मोहन सिंह लखनऊ गए और उन्होंने विधायकों मंत्रियों से बात करके दबाव बढ़ाया और योगी को बदलने तक की चर्चाएं चल पड़ीं जिनको राधामोहन सिंह की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और विधानसभा अध्यक्ष ह्रदय नारायण दीक्षित से की गई मुलाकातों से और बल मिला तब योगी ने सीधे सर संघचालक से संपर्क किया और उनसे अपनी स्थिति स्पष्ट की।
अमर उजाला अखबार का कहना है कि योगी ने मोहन भागवत से कहा कि पिछले साढ़े चार साल से मेरी सरकार ने केंद्र के हर निर्देश का पालन किया। यहां तक कि राज्यसभा, विधान परिषद चुनावों के लिए पार्टी के उम्मीदवारों की सूची केंद्रीय नेतृत्व बिना उनकी सलाह के तैयार करके भेजता रहा है और वह उसे मानते रहे हैं। योगी ने यह भी कहा कि राज्य के अधिकारियों को भी सीधे केंद्र से निर्देश मिलते रहे और उन्होंने उसे भी चलने दिया। संगठन के नाम पर सरकारी कामकाज और नियुक्तियों में दखल दिया जाता रहा। और अब असफलता का ठीकरा उनके सिर फोड़ा जा रहा है।
योगी ने भागवत से यह भी कहा कि अगर किसी मुख्यमंत्री से गृह गोपन और नियुक्ति विभाग भी ले लिए जाएं तो फिर उस मुख्यमंत्री का रहना न रहना बराबर है। इससे तो अच्छा है संघ प्रमुख अगर उन्हें निर्देश देते हैं तो वो अपना इस्तीफा ही दे देंगे। बताया जा रहा है कि इस बातचीत के बाद मोहन भागवत ने ही योगी को नड्डा, मोदी और शाह से मिलने को कहा।

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