कृष्णकांत
यूपी को लेकर लखनऊ से लेकर दिल्ली तक इतनी बैठकें क्यों हो रही हैं? क्योंकि ग्राउंड से जो रिपोर्ट है उसने पार्टी को बेचैन कर दिया है. अगर आप पूर्वी उत्तर प्रदेश से हैं तो आपको ये अंदाजा लग चुका होगा कि जनता के बीच पार्टी की हालत खराब है. 2014 में जनता की आकांक्षाएं आसमान पर थीं, वे अब टूटकर चूर हो चुकी हैं.
दर्जनों रिपोर्ट आप पढ़ चुके होंगे कि यूपी में रामराज की जगह ठाकुरराज चल रहा है और इस बात से प्रदेश के ब्राह्मण बुरी तरह नाराज हैं. विधायक, सासंद और पार्टी के कार्यकर्ता भी नाराज हैं. खुश कौन है, ये कोई नहीं जानता. इस बारे में​ रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व तक पहुंच चुकी है. इसलिए बेचैनी इतनी ज्यादा बढ़ गई है पिछले कई दिनों से मैराथन मीटिंग्स हो रही हैं.
राजनीति वह खेल है जिसमें रातोंरात चीजें बदल जाती हैं, लेकिन इस वक्त जो हालात हैं, अगर माहौल ऐसा ही बना रहा तो बीजेपी की हार तय है. इसीलिए बीजेपी और संघ दोनों ही इस हालात को बदलने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, 2022 में सियासत का ऊंट किस करवट बैठेगा, ये तो उसी वक्त पता चलेगा.

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