गिरीश मालवीय
हो सकता है कि आप जो मैकडॉनल्ड्स आउटलेट में फ्रेंच फ्राइज जो खाने जा रहे हो बिल गेट्स के खेत के आलू से ही बने हो….. खबर आ रही है कि द लैंड रिपोर्ट और अपने स्वयं के शोध के आंकड़ों का हवाला देते हुए, एनबीसी ने कहा कि मैकडॉनल्ड्स फ्राइज़ के लिए आलू वाशिंगटन राज्य के खेतों में उगाए जाते हैं जो इतने विशाल होते हैं कि आप उन्हें अंतरिक्ष से देख सकते हैं। ओर वे सारे खेत दरअसल बिल गेट्स के है
एनबीसी के अपडेटेड आंकड़ों के अनुसार, बिल गेट्स के पास अमेरिका के 18 राज्यों में 269,000 एकड़ कृषि भूमि है, जिससे वे अमेरिका के निजी कृषि भूमि के सबसे बड़े मालिक बन गए हैं।
आपको आश्चर्य होगा कि माइक्रोसॉफ्ट के मालिक बिल गेट्स की कृषि में क्या रुचि हो सकती है दरअसल कृषि क्षेत्र आजकल एक बेहद नाटकीय बदलाव के दौर से गुजर रहा है बड़े कारपोरेट की नजर इस पर जम चुकी है, पिछले दशक में अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और एशिया के अनेक देशों मे एक कॉर्पोरेट कृषि मॉडल पर काम किया गया है, बस भारत ही आखिरी गढ़ बचा था जहाँ कारपोरेट कल्चर का कृषि व्यवसाय खाद्य उत्पादन पर हावी होने में असमर्थ रहा था।……
मोदी सरकार ने उसकी भी शुरुआत कर दी है WEF यानी वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम की पिछले की थीम ‘द ग्रेट रीसेट’ थी दावोस में यह तय हुआ कि जिन देशों में कारपोरेट की पकड़ कृषि क्षेत्र में कम है उसे बढ़ाया जाए, ओर इसके लिए उन देशों की सरकारों के जरिए कानून बनाए जाए
अब आप समझ सकते हैं कि मोदी सरकार द्वारा पेश किए गए कृषि कानून की असलियत क्या थी WEF के जरिये कॉर्पोरेट जितना संभव हो सके इस ग्रह पर मानव जीवन के कई तत्वों को नियंत्रित करना। चाह रहा है खाद्य संप्रभुता कार्यकर्ता और लेखक वंदना शिवा कहती है कि कारपोरेट अब आर्टिफिशियल इंटलीजेंस ओर डिजिटल डेटा के जरीए हमारे द्वारा खाए जाने वाले भोजन के प्रत्येक निवाला का हिसाब किताब रख रहा है……
आप सोच भी नही सकते हैं आने वाले वर्षों में कृषि क्षेत्र की सूरत किस कदर बदलने वाली है

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