शिवाकांत अवस्थी

रायबरेली: कोरोना महामारी को देखते हुए यूपी बोर्ड और सीबीएसई ने 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं भी रद्द कर दी हैं। वहीं कोविड की दूसरी लहर की शुरुआत में 10वीं की परीक्षाएं भी कैंसिल कर दी गई थीं। ऐसे में रायबरेली के पूर्व छात्र नेता हिमांशु सिंह चौहान ने अब यूपी बोर्ड व सीबीएसई से बच्‍चों से लेकर जमा कराई गई परीक्षा फीस वापस करने की मांग की है।

   आपको बता दें कि, श्री चौहान ने कहा कि, सत्र 2020-21 के लिए स्‍कूलों ने छात्रों से परीक्षा शुल्‍क जमा कराया था। जिसे अब परीक्षा न होने की स्थिति में वापस किया जाए। श्री चौहान का कहना है कि, विगत मार्च से पूरा देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है। इस दौरान बीमारी और लॉकडाउन के साथ लगे तमाम प्रतिबंधों के कारण अभिभावकों की इनकम पर काफी बुरा असर पड़ा है। पूर्व छात्र नेता हिमांशु सिंह चौहान कहते हैं कि, अब जबकि दोनों कक्षाओं की परीक्षाएं रद्द हो चुकी हैं, तो छात्रों से लिया गया शुल्‍क वापस किया जाना चाहिए। पूर्व छात्र नेता श्री चौहान इसे छात्रों का नैतिक और विधिक अधिकार मानते है। ऐसे में इस सत्र की परीक्षा फीस जल्‍दी से जल्‍दी वापस की जाए।

    लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र नेता रहे हिमांशु सिंह चौहान ने रायबरेली के सभी स्कूलो से दसवीं और 12वीं की परीक्षा न होने की दशा में परीक्षा का शुल्क वापस करने की माँग की है। उनका कहना है कि, जब परीक्षा नहीं तो शुल्क नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि, प्राइवेट स्कूलो द्वारा मनमानी तौर से अभिववकों से शुल्क वसूले जाने की बात उनके सामने आइ है। अगर स्कूल संचालक इसी तरह मनमानी करते रहे, तो वह जल्द ही धरने पर बैठ कर मोर्चा खोलेंगे।

   वहीं अभिभावकों और छात्र नेताओं के द्वारा फीस वापसी की इस मांग पर सीबीएसई बोर्ड की ओर से कहा गया कि, छात्रों से लिया गया परीक्षा शुल्‍क सिर्फ परीक्षाओं के लिए नहीं होता, बल्कि इसका इस्‍तेमाल परीक्षाओं की तैयारी से लेकर छात्रों के परीक्षा परिणाम बनाने, डॉक्‍यूमेंट बनाने, 50 साल तक छात्र का रिकॉर्ड रखने आदि सभी कामों के लिए किया जाता है। ऐसे में परीक्षा रद्द होने पर फीस वापसी की मांग ठीक नहीं है। परीक्षाएं भले ही रद्द हुई हैं, लेकिन बाकी सभी काम तो होंगे। लिहाजा इस संबंध में कोई फैसला नहीं किया गया है।



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