प्रतापगढ़ में बनाया गया कोरोना माता मंदिर, पुलिस ने रातों-रात गिराया

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में बनाया गया कोरोना माता मंदिर का निर्माण पुलिस ने तोड़ दिया। कोरोना माता मंदिर बनाए जाने की सूचना पर रात में ही पहुंची पुलिस ने इसका निर्माण ढहा दिया। पुलिस ने बताया कि लोग कोरोना माता की पूजा-अर्चना कर रहे थे और लोगों में कोरोना पर अंधविश्वास फैल रहा था।

गांव के प्रधान शंकरलाल जायसवाल ने बताया कि रात लगभग 9 बजे के करीब स्थानीय पुलिस आयी और मंदिर को गिरवा दिया मंदिर का निर्माण करने वाले युवक को सुबह थाने पूछताछ के लिए ले गई।

युवक को पूछताछ के लिए थाने लाई युवक
जब इस बारे में में एसओ सांगीपुर तुसार दत्त त्यागी से बात की गई तो उनका कहना है मंदिर तोड़ने की जानकारी हमें नहीं है न किसी को हम पूछताछ के लिए ले थाने लाए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस पंचायत उपचुनाव में व्यस्त है।

7 जून को स्थापित कराई मूर्ति
आपको बता दें कि सांगीपुर के पूरे जूही (शुकुलपुर) में महामारी से तीन मौतें हुईं तो लोग डर गए। गांव के लोकेश श्रीवास्तव की पहल के बाद ग्रामीणों ने 7 जून को कोरोना माता की मूर्ति स्थापित कराई। विशेष ऑर्डर पर तैयार करवाई गई मूर्ति को गांव में नीम के पेड़ के पास स्थापित कर इसे कोरोना माता मंदिर का नाम दे दिया गया। ग्रामीणों का मानना था कि, पूर्वजों ने चेचक को माता शीतला का स्वरूप माना था और अब कोरोना भी देवी माता का ही रूप है।

मंदिर में बनाए गए थे ये नियम
ग्रामीणों का दावा था कि, यह विश्व का पहला कोरोना माता का मंदिर है। मंदिर में ऐसा लिखा भी गया है। मंदिर की दीवारों पर कुछ संदेश भी लिखे गए हैं। जिनमें कृपया दर्शन से पूर्व मास्क लगाएं, हाथ धोएं, दूर से दर्शन करें वरना…। इतना ही नहीं एक तरफ लिखा गया है कि कृपया सेल्फी लेते समय मूर्ति को न छुएं तो दूसरी तरफ कृपया पीले रंग का ही फूल, फल, वस्त्र, मिठाई, घंटा आदि चढ़ाएं।

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