श्याम मीरा सिंह
राम मंदिर के चंदा के नाम पर जो धंधा चल रहा है, उसका पहला लीक बाहर आ गया है. मंदिर ट्रस्ट के नाम पर 2 करोड़ की ज़मीन 18.5 करोड़ रुपए में ख़रीदी गई है. पूरा मामला ऐसे है कि 18 मार्च के दिन पहले एक ज़मीन 2 करोड़ रुपए में ख़रीदी गई. ये ज़मीन बाबा हरिदास ने रवि मोहन तिवारी और सुल्तान अंसारी को बेची थी.
जैसे ही इस ज़मीन का दाखिला ख़ारिज हुआ उसके पाँच से दस मिनट बाद ही ये ज़मीन मंदिर ट्रस्ट को 18 करोड़ रुपए में बेच दी गई. ग़ज़ब की बात ये है कि बेचने और ख़रीदने दोनों में ही राम मंदिर के ट्रस्टी अनिल मिश्रा और मेयर ऋषिकेष उपाध्याय गवाह रहे हैं. जिस दिन ज़मीन ख़रीदी गई उसी दिन RTGS (इंटरनेट बैंकिंग) के माध्यम से 17 करोड़ रुपए का ट्रैंज़ैक्शन किया भी गया. मतलब बड़ी ही सफ़ाई से Money laundering की गई थी ताकि किसी को पता ही न चले.
जो ट्रस्टी इस ज़मीन की ख़रीद-फ़रोख़्त में गवाह रहे हैं, उनका अतीत भी जान लीजिए, जो अनिल मिश्र जी हैं, वे होम्योपैथी के डॉक्टर हैं. RSS के अवध प्रांत के प्रांत कार्यवाह भी रहे हैं. कार्रवाह संघ में Executive president की तरह होते हैं. जो RSS की अवध यूनिट है उसके ये Executive president रहे हैं.
जो मेयर हृषिकेश उपाध्याय हैं, ये महाराज साल 2017 में भाजपा की सीट पर चुनाव लड़के मेयर बने हैं, जब इन्होंने शपथ ली थी तो पूरे मंत्रोच्चार के साथ ली थी. नीचे मेयर साहब और प्रधानसेवक जी की एक तस्वीर है.
इससे पहले निर्मोही अखाड़े ने भी RSS के विश्व हिंदू संगठन पर आरोप लगाया था कि राम मंदिर के नाम पर VHP ने 1400 करोड़ रुपये तक वसूले हैं.
राम मंदिर के नाम पर जो इस देश के लोगों को मूर्ख बनाया गया है पूरी दुनिया में इससे बड़ा राजनीतिक, आर्थिक घोटाला नहीं मिलेगा. राम मंदिर के नाम पर इस देश ने मूर्खों को देश सौंप रखा है. अगर कोई ढंग से जाँच करे तो ऐसे कितने घोटाले निकलेंगे.

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