Zaigham Murtaza
क़तर में होने वाले अगले फीफा विश्व कप के लिए एशिया की 46 टीम क्वालीफायर्स के दूसरे दौर में हैं। इनमें से पांच टीम विश्व कप में खेलेंगी। भारत क्वालीफायर्स के दूसरे दौर में तीसरे स्थान पर है और तक़रीबन बाहर है। ग्रुप डी में फिलीस्तीन के भारत बराबर यानी सात अंक हैं। ग्रुप डी में ही यमन के पांच अंक हैं। आठ ग्रुप में से तीसरे दौर में पहुंचने की रेस में जो बारह टीम हैं (8 टापर और 4 रनर अप) उनमें जापान, चीन, आस्ट्रेलिया और उत्तर कोरिया के अलावा ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और मेज़बान क़तर जैसी एशियाई पावर हाऊस तो हैं ही, आश्चर्यजनक रूप से युद्ध और आतंकवाद पीड़ित इराक़, सीरिया, लेबनान भी हैं।


सीरिया ग्रुप ए में और इराक़ ग्रुप सी में टाॅप पर है। ग्रुप डी में सउदी अरब, ग्रुप ई में क़तर टाप पर हैं और सीधे अगले राउंड में जाएंगे। ग्रुप बी में जार्डन, ग्रुप सी में ईरान, ग्रुप डी में उज़्बेकिस्तान, ग्रुप ई में ओमान, ग्रुप एफ में किर्गीस्तान, ग्रुप जी में यूएई और ग्रुप एच में लेबनान दूसरे स्थान पर हैं। ग्रुप एफ में ताजिकिस्तान और किर्गीस्तान के बराबर अंक हैं लेकिन गोल अंतर पर ताजिकिस्तान पीछे है। इनमें चार टीम प्ले ऑफ के ज़रिए अगले राऊंड में पहुचेंगी।


अगले राऊंड में छ टीमों के दो ग्रुप की टापर और रनर सीधे क्वालिफाई कर जाएंगी जबकि तीसरे स्थान पर रहने वाली दो टीम आपस में प्लेऑफ खेलेंगी, फिर विजेता विश्व कप में जाएगी। अभी तक के प्रदर्शन के आधार पर जापान और दक्षिण कोरिया के अलावा इराक़ और मेज़बान क़तर क्वालीफाई करने के सबसे बड़े दावेदार हैं। इराक़ के अलावा अगर सीरिया या लेबनान क्वालीफाई करते हैं तो यह अपने आप में न सिर्फ चमत्कार होगा बल्कि गृहयुद्ध, आतंकवाद और हिंसा झेल रहे इन देशों के ज़ख़्म भरने, लोगों को जोड़ने और ज़िंदगी वापस पटरी पर लाने में सहायक होगा।

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