शिवाकांत अवस्थी

महराजगंज/रायबरेली: महराजगंज तहसील में अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी तथा आए दिन होने वाली हड़ताल के चलते वादकारियों को मुकदमों में आए दिन तारीख पर तारीख मिलती रहती है। हालत यह है कि, सैकड़ों की तादात में अविवादित मामले भी 6 माह से लंबित पड़े हुए हैं। वादकारी तहसील के चक्कर लगाते लगाते परेशान हो चुके हैं। वादकारियों ने जिलाधिकारी से रिक्त पदों पर अधिकारी और कर्मचारी तैनात करके अन्य विवादित मामलों का निस्तारण तेजी से कराने की मांग की है।

   आपको बता दें कि, तहसील महराजगंज में सेमरौता, हरदोई, कुंम्हरावां और बछरावां 4 परगने शामिल है। नियमत: चारों परगनों में तीन नायब तहसीलदारों की नियुक्ति होनी चाहिए, लेकिन इस समय महज एक नायब तहसीलदार अभिजीत गौरव ही तैनात है। वह भी अभी अंडर ट्रेनिंग है। उन्हें मुकदमे सुनने और निर्णय करने का अधिकार नहीं है। इससे पहले यहां एक अन्य नायब तहसीलदार ऋषिकांत मिश्रा अक्टूबर माह में तैनात हुए थे। लेकिन उनका भी स्थानांतरण ऊंचाहार के लिए हो गया। उन्होंने भी, एक भी मुकदमे की सुनवाई नहीं की थी।

   आपको यह भी बता दें कि, यहां तैनात रहे नायब तहसीलदार रामकिशोर वर्मा की तैनाती के दौरान मुकदमों का निस्तारण तेजी से हो रहा था। लेकिन 30 नवंबर 2020 को वह रिटायर हो गए। इसके बाद से नायब तहसीलदार की कोटे 1 दिन भी नहीं चली। एक अनुमान के मुताबिक चारों परगनों की लगभग 300 पत्रावलियां ऐसी लंबित हैं, जो अविवाहित हैं, जिनमें केवल आर्डर होना शेष है। इसके अलावा डेढ़ हजार से अधिक विवादित मुकदमे भी सुनवाई होने के बिना तारीख पर तारीख लगाई जा रही हैं।

   इसके बाद जितने नायब तहसीलदार होने चाहिए उतने ही सहायक रजिस्ट्रार कानूनगो भी तैनात होने चाहिए। विगत 4 माह से यहां पर सहायक रजिस्ट्रार कानूनगो के पद भी रिक्त चल रहे है। तहसील के अधिवक्ताओं की मांग पर जिलाधिकारी द्वारा फिलहाल एक सहायक रजिस्ट्रार कानूनगो की नियुक्ति की गई है। ताकि असंक्रमणीय से संक्रमणीय तथा तहसील के रोजमर्रा के छोटे-छोटे कामों को प्रारंभ किया जा सके। अब रही बात तहसीलदार पद की तो यहां रहे तहसीलदार विनोद कुमार सिंह विगत 8 फरवरी को राजस्व परिषद द्वारा एक मामले में निलंबित कर दिए गए थे। तब से तहसीलदार की कोर्ट में महज दो-चार दिन ही मुकदमों की सुनवाई हो सकी, नहीं तो यहां भी कामकाज ठप है। हालांकि जिलाधिकारी द्वारा विनोद सिंह के हटने के बाद अजय गुप्ता की तैनाती की गई थी, लेकिन महज दो-चार दिन बाद ही उनकी नियुक्ति सलोन तहसील में कर दी गई, और यहां पर सलोन से आए आर0के0 शुक्ला ने तहसीलदार का पद संभाल लिया। दुर्भाग्य से उसके बाद कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप आ गया, और कोर्ट में सुनवाई बंद हो गई।

 इसी दरमियान आर0के0 शुक्ला का प्रमोशन एसडीएम के पद पर हो गया। नए नियमों के मुताबिक एसडीएम तहसीलदार की कोर्ट का संचालन नहीं कर सकता है। जिससे यहां भी सुनवाई ठप हो गई है। एक अनुमान के मुताबिक तहसीलदार कोर्ट पर भी लगभग 100 मामले अविवादित निस्तारण के लिए पड़े हुए हैं। जबकि विवादित मुकदमों की संख्या 1000 से ऊपर है, जिनमें हर तारीख पर नई तारीख लगा दी जाती है।

    यह तो रहा अधिकारी और कर्मचारियों की कमी का मामला जिसकी वजह से तहसील क्षेत्र के हजारों वादकारी तारीखों पर तहसील आते हैं, और चक्कर काटकर तारीख लेकर चले जाते हैं। हालांकि कोरोना की दूसरी लहर के मंद पड़ने के बाद एसडीएम सविता यादव ने कोर्ट चलाने का निर्णय लिया, लेकिन स्थानीय अधिवक्ता बंधुओं ने जून माह में ग्रीष्मकालीन अवकाश के चलते काम करने से मना कर दिया। जिससे एसडीएम की अदालत भी नहीं चल सकी, और पुराने मामले निपटारा होने से शेष रह गए। 

   क्षेत्र के वादकारियों थुलेंडी गांव के रहने वाले सनोद कुमार, नारायणपुर गांव के रहने वाले रमाकांत तिवारी, महराजगंज कस्बे के रहने वाले रिटायर्ड एडीओ पंचायत रामप्यारे सिंह, थुलेंडी के रहने वाले शाह मोहम्मद उर्फ कुनई, माया देवी निवासी कसना, अमन सिंह निवासी मुरैनी, नीरज चौरसिया निवासी नीम टीकर विनोद कुमार निवासी पुरासी, जीवन प्रसाद निवासी पाराकला आदि ने बताया कि, वह सालों से अपने मुकदमों की सुनवाई के लिए तहसील के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन आए दिन अधिकारियों के न बैठने और होने वाली हड़तालों तथा कोरोना जैसी महामारी के चलते उनके मुकदमों की सुनवाई नहीं हो पा रही है, और हर पेशी पर वह हर्जा खर्चा करके तारीख लेकर लौट जाते हैं।

   उधर तहसील के अधिवक्ता भी अधिकारियों की कमी के चलते खासे परेशान रहते हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता व वरिष्ठ पत्रकार अजय श्रीवास्तव का कहना है कि, लगभग 300 अविवादित दाखिल खारिज पेंडिंग पड़ी हुई है। जिनका निस्तारण नहीं हो पा रहा है, जबकि शासन का आदेश है कि, नामांतरण वाद की कार्यवाही समय सीमा के अंदर निपटाई जाए, इसके बावजूद विभागीय कर्मचारी मामले को संज्ञान नहीं ले रहे हैं। जिसकी वजह से शासन की छवि धूमिल हो रही है।

  जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता भूपेश कुमार मिश्रा का कहना है कि, नायब तहसीलदारों रजिस्टार कानूनगो के पदों पर नियुक्ति न होने से तमाम अविवादित मामले भी निस्तारण के लिए पड़े हुए हैं। मुवक्किल अक्सर अधिवक्ताओं से नाराज होते हैं, लेकिन किया जाए। इसी प्रकार वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार श्रीवास्तव, विद्यासागर अवस्थी, शिवसागर अवस्थी, मनोज कुमार श्रीवास्तव, ज़ुबैर अहमद, ज्योति प्रकाश अवस्थी, अशोक यादव, सर्वेश अवस्थी, इम्तियाज अली, अतुल कुमार पांडेय, सत्य प्रकाश मिश्रा आदि ने जिलाधिकारी से मांग की है कि, वादकारियों के हित में महराजगंज तहसील के रिक्त पड़े नायब तहसीलदारों और रजिस्टार कानूनगो के पदों पर शीघ्र ही तैनाती की जाए। ताकि बढ़ रहे लंबित वादों की संख्या पर लगाम लगाई जा सके, और लोगों को सरलता और शीघ्रता से न्याय मिल सके।



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