फुरकान खान
कोरोना के कहर से कोई भी नहीं बचा है जो भी इसकी ज़द में आया है उसको इसने नुकसान पहुंचाया है चाहे वो, होटल, रेस्तरां, स्कूल, कारोबार, कोचिंग या नोकरी ही क्यों न हों। हर वर्ग ने कोरोना के नुकसान को झेला है और झेल रहा है। पिछली मर्तबा जब मज़दूरों से बात हुई थी उस वक़्त पता चला था कि कोई इंजीनियर भी है जिसकी नौकरी चली गई है और वह मज़दूरी कर रहा है
इंजीनियर की तलाश में हर रोज़ में मज़दूरों की जगह तक पहुंच रहा था वह इंजीनियर तो नहीं मिला लेकिन एक टीचर ज़रूर मिल गए संदीप शर्मा (बदला हुआ नाम) वह बताते हैं “बीएससी किया है इंदौर के भावरकुवा पे कोचिंग पढ़ाया करता था सारे सब्जेक्ट पढ़ा लेता हूं लॉकडाउन हुआ तो कोचिंग बन्द हो गई काम कुछ बचा नहीं था घर भी नहीं जा सकता था यहीं एक आदमी से मुलाक़ात हुई उससे काम के बारे में पूछा उसके साथ मज़दूरी करने लग गया था चार पैसे आजाते हैं खाना खर्चा निकल जाता है और यहीं तालाब के किनारे सू जाता हूँ।
लगा था जल्दी लॉकडाउन खत्म होगा तो घर वापस चला जाऊंगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ इशी बीच साथ रहने वाले को मोबाइल की ज़रूरत थी उसको दे दिया और आज चालीस पैतालीस दिन हो गए हैं उसने मोबाइल नहीं दिया आज कल करता है याब उसके पास भी वो मोबाइल नहीं है जहां वो किराए से रहता था जब वो पैसा न चुका पाया तो मकान मालिक ने उसके कमरे में ताला डाल दिया और सारा सामान कमरे के अंदर ही है। मुझे उसने मकान मालिक के पास जाने से मना किया है।
अगर में उसके मकान मालिक के पास जाता तो वो रहम खा कर मुझे मेरा मोबाइल दे देता मगर मैने उसे ज़बान दी है मैं नहीं जाऊंगा। घर वाले परेशान रहते हैं जभी उनसे बात होती है मोबाइल का पूछते हैं बहना बना देता हूँ, घर से पैसों की कोई तंगी नहीं है सक्षम हूँ पापा के कई प्लाट हैं इंदौर में, घर से चवदा लोग पुलिस में हैं मैने आईएस की एग्ज़ाम भी पास कर ली थी दिल्ली के तृसटी दी विज़न और न्यास में पढ़ता था लेकिन मुझे आईपीएस बनना था
सब अच्छा चल रहा था लेकिन मेरी बॉडी से ज़हर मिला पता नहीं मुझे किसने दिया किसी पर शक भी नहीं है बस आईपीएस का सपना वहीं टूट गया फिर बीएससी किया। बस याब मोबाइल मिल जाए तो मैं घर जाऊं”। कोरोना की वजह से कई लोगों की नोकरियाँ चले गई लोगों के घर उजाड़ गए, खाने को तरस गए लेकिन सरकार चुनाव में लगी रही।
संदीप से बात इंतेखाम पर थी जाते जाते कहते हैं “आज उसने मोबाइल लौटाने का कहा है घर चले जाऊंगा इतने दिन मज़दूरों के बीच रह कर ये बात समझ आई कि ये परेशान तो बोहोत हैं मगर साथ ही शराब ने भी इन्हें मार रखा है तकरीबन अस्सी फ़ीसद मज़दूर यहां शराब पीते हैं” इतना सुनते ही पास में बैठे गोपाल ने कहा “मैं पेट्रोल पंप पे काम करता था मुझे उन्होंने कहा शराब छोड़ दो लेकिन मैंने नोकरी छोड़ दी”।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *