इब्न ए आदम
पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन और उनके साथ तीन दूसरे लोगों को उत्तर प्रदेश पुलिस ने धार्मिक भावनाएँ भड़काने और शांति व्यवस्था भंग करने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया था । सिद्दीक़ कप्पन हाथरस गैंग रेप मामले की रिपोर्टिंग के लिए जा रहे थे , तब उन्हें गिरफ़्तार किया गया था ।
उनकी ज़मानत के लिए उनका परिवार लोअर कोर्ट से हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट के चक्कर लगाता रहा लेकिन UAPA की वजह से उन्हें किसी कोर्ट में रिलीफ़ नहीं मिला । कप्पन फ़िलहाल बीमार हैं और कोर्ट के आदेश पर उनका इलाज AIIMS में चल रहा है ।
आज मथुरा कोर्ट ने उनके ख़िलाफ़ लगी धारा 116(6) को वापस ले लिया है क्यूँकि पुलिस इस सम्बंध में 6 महीने गुज़रने के बाद भी जाँच पूरी नहीं कर पायी है। उनके ख़िलाफ़ पुलिस के पास कोई सबूत पहले दिन से नहीं था फिर वो जाँच रिपोर्ट जमा भी कहाँ से करते ?? उम्मीद है अब सिद्दीक कप्पन और उनके साथ गिरफ़्तार हुए अन्य तीन लोगों को ज़मानत मिल जाएगी ।
UAPA , सिडिशन और NSA जैसी गम्भीर धाराओं का दुरुपयोग जिस तरह से तेज़ी से हो रहा है , यह देश के लिए , समाज के लिए , लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है । सरकार से तो कोई उम्मीद नहीं है कि वो अपने रुख़ में बदलाव करेगी , कम से कम कोर्ट ही ऐसे मामलों में कार्यवाही तेज़ी से करके विक्टिम को न्याय देने में जल्दी करें ।
देर से मिला न्याय भी तो अन्याय की श्रेणी में ही आता है ।

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