श्याम मीरा सिंह
लोग ट्विटर पर हर रोज़ चिल्लाते रह जाते हैं, लाखों ट्वीट हो जाते हैं. हज़ारों शेयर हो जाते हैं. लोग दुहाई करते हैं कि इस पर कार्रवाई करो. इस पीड़ित को न्याय दो. यूपी पुलिस का कभी रिप्लाई नहीं मिलता. रिप्लाई मिलता है तो कार्रवाई नहीं होती. कार्रवाई होती है तो अगले दो-एक हफ़्ते में अपराधी छूट जाता है. कल एक वीडियो वायरल हुई एक भीड़ एक बुजुर्ग की दाढ़ी खींच रही है.
लोगों को जैसी सूचना मिली, वैसे शेयर कर दी. इत्तेफाकन उस वीडीयो को लेकर जो आरोप लगाए गए थे कि बुजुर्ग को जय श्री राम के नारे लगाने के नाम पर पीटा गया है, वे आरोप ग़लत निकल आए. सही तथ्य ये था कि वो एक तांत्रिक था और उसी के समुदाय के लोगों ने उसे पीटा था. लेकिन हर मुद्दे पर पीड़ित की आवाज़ उठाने वाले इस वीडीयो की आड़ में फँसा लिए गए.
अब योगी ने उन पर मुक़दमा करवा दिया है कि ये लोग धार्मिक आधार पर उत्तेजना फैला रहे थे, सामाजिक सौहार्द ख़राब कर रहे थे. यूपी को बदनाम कर रहे थे. इस मामले में अधिकतर उन मुस्लिम एक्टिविस्टों को फँसा लिया गया जो लगातार अपने समाज पर हो रहे हमलों के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं. लेकिन अब क्या है?
एक ट्वीट को आधार बनाकर यूपी सरकार उन्हें लपेटने के मूड में है, इसमें अधिकतर पत्रकार हैं, जुबेर अहमद, राना अय्यूब, द वायर, सलमान निजामी, मसकूर उस्मानी, डॉ समा मोहम्मद, सबा नकवी. इन सबको अब सरकारी टोर्चर झेलना होगा. नाम रख दिया कि सामाजिक सौहार्द ख़राब कर रहे थे. जबकि यही वे लोग हैं जो सामाजिक सौहार्द के लिए लड़ रहे हैं, और सरकार इनसे बदला भी इसलिए ले रही है क्योंकि ये लोग सामाजिक सौहार्द के लिए RSS और भाजपा की विचारधारा से लड़ रहे हैं.
सामाजिक सौहार्द उन लोगों के लिए चिंता का विषय हो ही नहीं हो सकता जो दंगों और लिंचिंग को मार्ग बनाकर राजमहलों तक पहुँचे हैं. कल परसों दंगाई मानसिकता का एक आदमी, हरियाणा के मेवात में, आसिफ़ के हत्यारों के पक्ष में हो रही पंचायत में आता है, मुसलमानों की हत्या की बात करता है,
उस पर कार्रवाई करने की बजाय भाजपा सरकार उसे अपना प्रवक्ता बना देती है. कोई FIR उसके ख़िलाफ़ नहीं होती, उल्टा उसे अपनी पार्टी का प्रवक्ता बनाकर अवार्ड दिया जाता है. वही पार्टी, पीड़ित लोगों के लिए आवाज़ उठाने वाले एक्टिविस्टों और पत्रकारों को फँसाने के लिए अब सड़े हुए पुलिसतंत्र का इस्तेमाल कर रही है, और कह रही है कि ये लोग सामाजिक सौहार्द ख़राब कर रहे थे.
अगर यूपी पुलिस के लिए सच में धार्मिक सौहार्द कभी चिंता का विषय रहा है और उसके आधार पर FIR की जा रही हैं तो मैं CM योगी आदित्यनाथ, उनके मंत्रियों, विधायकों और कार्यकर्ताओं की ऐसी ढेरों वीडियो और बयान दिखाने के लिए तैयार हूँ जिनमें ये लोग दो धर्मों के बीच का सामाजिक सौहार्द खराब ही नहीं कर रहे बल्कि जहर घोल रहे हैं. क्या यूपी पुलिस एक्शन लेगी?

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