कालीन नगरी भदोही में एक और कारोबार ने व्यापारियों के चेहरे पर लौटाई खुशी, बड़े पैमाने पर विदेश कर रहे निर्यात

भदोही के कालीन निर्यातक अब फलों के निर्यात के कारोबार में अपना हाथ आजमा रहे हैं और उन्हें सफलता भी मिल रही है। एक निर्यातक बड़े पैमाने पर फलों के राजा आम को दुबई निर्यात कर रहे हैं और उन्हें जामुन निर्यात करने का भी ऑर्डर मिल रहा है। वहीं, एक और कालीन निर्यातक केले की निर्यात की योजना बना रहे हैं और दो एकड़ में ऑर्गेनिक केले की खेती कर रहे हैं।

वैसे तो उत्तर प्रदेश का भदोही जिला वैश्विक पटल पर खूबसूरत और नायब कालीनों के लिए प्रसिद्ध है और यहां से हजारों करोड़ की कालीन विदेश में निर्यात की जाती है, लेकिन निर्यातक अब दूसरे कारोबार कर विदेशी मुद्रा अर्जित करने का काम कर रहे हैं। भदोही के छतमी में 40 वर्षों से कालीन का कारोबार कर रही त्रिवेणी कारपेट कम्पनी के शाश्वत पांडेय दशहरी और लंगड़ा आम को दुबई निर्यात कर रहे हैं और उन्हें अब जामुन निर्यात करने का भी ऑर्डर मिल गया है।

1.2 मीट्रिक टन आम दुबई भेज चुके हैं शाश्वत
शाश्वत को दुबई में आम निर्यात करने के लिए 50 लाख का ऑर्डर मिला है, जिसके तहत वो 1.2 मीट्रिक टन की खेप दुबई भी भेज चुके हैं। शाश्वत बताते हैं कि फलों के कारोबार में हाथ आजमाने का रास्ता उनके पुरखों की बदौलत मिला। उनका परिवार पहले से ही कृषि कर रहा है और उनके पास 500 आम के पेड़ का बगीचा है। वो फलों का निर्यात करना चाहते थे, इसके लिए ट्रीसागर फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी बनाई और निर्यात के अवसर तलाशने लगे।

दुबई से 50 लाख का मिला आर्डर
इसके लिए उनके ही दुबई के एक कालीन आयातक की मदद मिली। दुबई के कालीन आयातक के भाई वहां के मंडी ट्रेडर हैं और उन्होंने 50 लाख का ऑर्डर दिया है। शाश्वत बताते हैं कि इसमें फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन की उन्हें काफी मदद मिली। उनसे अब फलों के किसान जुड़ रहे हैं। वाराणसी, सोनभद्र, मलिहाबाद से लेकर दूसरे स्थानों के किसान उनसे जुड़ रहे हैं, जिससे उनकी उपज का अच्छा दाम उन्हें दिया जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय मानकों पर होती है पैकिंग
आम को निर्यात करने से पहले लखनऊ में सरकार की तरफ से बनाए गए मैंगो पैक हाउस में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार आम की पैकिंग की जाती है। उनके तरफ से निर्यात की जाने वाले आम की पैकिंग पर ‘असली बनारसी’ का स्लोगन दिया गया है। उन्होंने बताया कि उन्हें 500 किलोग्राम जामुन निर्यात करने का भी ऑर्डर मिला है।

केले की खेती से संवार रहे जिंदगी
इसी तरह भदोही के औराई के कालीन निर्यातक रणजीत सिंह भी केले के निर्यात की योजना बनाकर काम कर रहे हैं। उन्होंने दो एकड़ में ऑर्गेनिक केले की खेती कर रखी है। रणजीत भदोही के पुराने कालीन निर्यातकों में हैं और उन्होंने बताया कि उनके एक मित्र ने केले की खेती के लिए प्रेरित किया, जिसके बाद वो कृषि विभाग के सहयोग से दो एकड़ में केले की खेती किए हुए हैं। उनका कहना है कि निर्यात में अनुभव है और जब केले की उपज तैयार होगी तो इसे सीधे निर्यात करेंगे। इसके लिए वो अपने ही कालीन आयातकों की मदद लेंगे।

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