बहादुरगढ़। तीन कृषि कानूनों को रद्द करवाने के लिए चल रहे किसान आंदोलन में अब हर रोज लड़ाई, मारपीट, दुष्कर्म, आत्महत्या और अब हत्या के केस भी सामने आने लगे हैं। आंदोलन में टिकरी बॉर्डर पर एक बड़ी घटना सामने आई है। कल रात टिकरी बॉर्डर पर एक आंदोलनकारी को आग लगाकर मार डाला गया है। बताया जा रहा है कि मृतक ने जलने से पहले आंदोलन को लेकर जातिय टिप्‍पणी की थी, जिसके बाद उसे जलाने की बात कही जा रही है। इस घटना के बाद आंदोलन फिर से सवालों के घेरे में है।

बहादुरगढ़ बाईपास पर गांव कसार के पास आंदोलन में गए गांव कसार के ही एक व्यक्ति को तेल छिड़ककर आग लगा दी। गंभीर रूप से झुलसे व्यक्ति की कुछ घंटों बाद उपचार के दौरान मौत हो गई। जींद के एक युवा आंदोलनकारी पर तेल छिड़ककर आग लगाने का आरोप है। घटनास्थल पर आरोपित का एक वीडियो भी सामने आया है। वह जातिगत टिप्पणी कर रहा है। आंदोलन में शहीद होने का नाम देकर कसार निवासी मुकेश पर तेल छिड़का गया और फिर आग लगाई गई। इससे पहले उसे शराब भी पिलाई गयी।

मृतक के भाई के बयान पर पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। हत्यारोपी अभी फरार है। पुलिस का दावा है कि आरोपित को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। हत्या के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। पुलिस को दी शिकायत में गांव कसार निवासी मदन लाल पुत्र जगदीश ने बताया कि मेरा भाई मुकेश बुधवार शाम लगभग 5:00 पीएम पर घर से घुमने के लिए निकला था जो कि किसान आन्दोलनकारियो के पास पहुंच गया। मुझे टेलीफोन से पता चला कि आपके भाई पर आन्दोलनकारियो ने जान से मारने की नीयत से तेल छिड़ककर आग लगा दी।

मैं तुरंत अपने गांव के पूर्व सरपंच टोनी को लेकर मौके पर पहुंचा तो मेरा भाई मुकेश गंभीर उसे झुलसा हुआ था। उसे हम तुरंत सिविल अस्पताल लेकर आए। यहां उपचार के दौरान मुकेश ने बताया कि आंदोलन में एक व्यक्ति ने जिसका नाम कृष्ण है और सफेद कपड़े पहने हुए था उसने पहले शराब पिलाई और फिर उसे आग लगा दी। इससे वह बुरी तरह झुलस गया।

सिविल अस्पताल में गंभीर रूप से झुलसे मुकेश को चिकित्सकों ने रेफर कर दिया, मगर परिजन उसे ब्रह्मशक्ति संजीवनी अस्पताल लेकर गए जहां पर रात को ही उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इस संबंध में पहले जान से मारने का प्रयास का मामला दर्ज किया गया था। मगर मौत होने के बाद अभी हत्या की धारा भी जोड़ दी गयी हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है। शव का कुछ देर बाद सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम किया जाएगा।

उधर परिजनों ने मृतक का शव लेने से मना कर दिया है । पीड़ित परिवार ने कहा है कि उनके परिवार को मुआवजा दिया जाए और सरकारी नौकरी दी जाए। परिजनों ने आंदोलनकारी किसानों को भी गांव से दूर बसाने की मांग है। डीएसपी पवनकुमार परिजनों को समझाने में जुटे हुए है। फिलहाल पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया है।

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