रायबरेली: जनपद के महराजगंज कोतवाली क्षेत्र में 13 साल की नाबालिक लड़की को अगवा किए जाने के बाद मां बाप ने पुलिस प्रशासन से मदद की गुहार लगाई और नाबालिक लड़की को दबंग के चंगुल से छुड़ाकर मेडिकल कराकर मुकदमा दर्ज कराने की मांग के साथ साथ लड़की और पीड़ित परिवार को इंसाफ दिलाने की कोशिश की। लेकिन यह कोशिश उन्हे महंगी पड़ गई। जबकि आरोपी के पक्ष में पुलिस स्वयं खड़ी हो गई। पुलिस ने नाबालिक लड़की को मेडिकल कराने तथा उसे मां-बाप को सौपे जाने के बजाए आरोपी को ही सौंप कर थाने से जाने दिया गया।
बार-बार इंसाफ की गुहार कर रहे लड़की के मां बाप को रास्ते से जबरन उठाकर पुलिस ने एक कमरे में बंद कर पैर के बूंटों से जमकर कुचला और सुलहनामा पर जबरन अंगूठा दस्तखत करवा कर हिदायत दी कि, इस मामले में कहीं मुंह खोला, तो मुठभेड़ में मार दिए जाओगे। चर्चा यह भी है कि, दलालों के माध्यम से एक नाबालिक लड़की की आबरू का सौदा किया गया। पीड़ित परिवार ने जनपद के पुलिस विभाग के मुखिया श्लोक कुमार से मांग की है कि, उसकी लड़की को आरोपी के चंगुल से मुक्त करा कर आरोपी के विरुद्ध विधिक कार्यवाही की जाए, और परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए।

आपको बता दें कि, यह चकित करने वाली घटना की शुरुआत क्षेत्र के एक गांव में विगत 5 तारीख को शुरू हुई। जबकि गांव का रहने वाला लोध परिवार का हट्टा कट्टा दबंग युवक गांव के दलित के घर में घुस गया। मां बाप का कहना है कि, रात ही में उसने उनकी 13 वर्षीया लड़की को उठा ले गया। सुबह जब मां-बाप को लड़की घर में नहीं मिली, तो उसकी तलाश रिश्तेदारों में की जाने लगी।
लेकिन जब कहीं पता नहीं चला तो वापस घर आने पर दबी जबान में कुछ लोगों ने बताया कि, तुम्हारी लड़की को राममिलन लोध के लड़के कल्लू ने छुपा रखा है। सूचना मिलते ही लड़की के मां-बाप पहले तो राम मिलन के घर पहुंचे, और लड़की वापस देने को कहा। लड़की वापस देने की बात तो दूर आरोप है कि, दबंग राममिलन व उसके परिवार के लोग लाठियां लेकर सामने आ गए, लड़की के मां-बाप को अनाप-शनाप गालियां देते हुए कहा कि, भाग जाओ नहीं तो हाथ पैर तोड़ देंगे।

आपको बता दें कि, बेहद गरीब और कमजोर मां बाप ने यह बात गांव के अन्य लोगों को बताई, तो लोगों ने महराजगंज कोतवाली प्रभारी की खूब प्रशंसा करते हुए मां बाप को वहां जाकर फरियाद करने की सलाह दी। मामला थाने आ गया। तो पुलिस तुरंत सक्रिय हो गई और किशोरी को बरामद कर आरोपी कल्लू को भी थाने ले आई। पूछताछ शुरु हो गई। अचानक पुलिस के तेवर बदल गए।
पुलिस ने किशोरी को मां बाप के हवाले करते हुए लड़की को घर ले जाने और मामले में सुलहनामा लगा देने की सलाह दी, किंतु मां बाप लड़की को साथ में ले जाकर उसका मेडिकल कराने और रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही करने की मांग करने लगे। वहां पर मौजूद कुछ बिचौलियों ने मां बाप से लेन-देन की बात का भी प्रस्ताव रखा, लेकिन पीड़िता के मांता पिता कानूनी कार्यवाही से कम पर कुछ सुनने को तैयार नहीं हुए।
तो कोतवाली प्रभारी का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया। उन्होंने पीड़िता को आरोपी कल्लू के हवाले करते हुए उसे ले जाने को कहा, साथ ही मां और बाप को कड़ी हिदायत दी कि, कहीं रिपोर्ट किया या फिर किसी उच्चाधिकारी को जानकारी दी तो ऐसी धारा में जेल भेजूंगी जिससे ता उम्र जेल में ही रहोगे। यह कहकर कोतवाल रेखा सिंह ने पीड़िता के मां बाप को दुत्कार कर थाने से भगा दिया।
कहानी का अंत यही नहीं हुआ। पुलिस को लगा कि, बगैर कुछ लिखाए पढ़ाए पीड़िता के मां-बाप को भेजना उचित नहीं है। पीड़िता के मां-बाप का कहना है कि, वह जैसे ही घर के लिए निकलकर पाली गांव तक पहुंचे होंगे, तभी पीछे से पुलिस का चार पहिया वाहन वहां भी पहुंच गया, और मोटरसाइकिल को ओवरटेक कर पीड़िता की मां को जबरन वाहन में बैठा लिया, और उनके पति को कहा कि, तुम भी थाने आओ। पति-पत्नी ने पत्रकारों को बताया कि, कोतवाल ने आगंतुक कक्ष में उन्हें बुलाकर बूट की ठोकरों से बहुत मारा और कई सादे कागजों पर अंगूठा दस्तखत करा लिया और कहा कि, अब इस मामले में कहीं शिकवा शिकायत की, तो तुम्हारी वह हालत बनेगी की सात पीढ़ियां याद करेंगी।

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