सौमित्र रॉय
2014 में मोदी सरकार जब आई तब केंद्र को 99,068 करोड़ का आबकारी राजस्व मिल रहा था। 2020-21 में यह 2 लाख 36 हज़ार करोड़ हो गया (9 माह का उपलब्ध आंकड़ा)। यानी 138% की बढ़ोतरी। हालांकि, 2014-15 से 2019-20 के दौरान पेट्रोलियम पदार्थों की खपत सिर्फ 29% बढ़ी।
चक्कर खा गए न? खपत बढ़ी 29%, लेकिन मोदी सरकार की कमाई बढ़ी 136%. इसे डकैती कहते हैं। मोदी राज में हो रही इस कमाल की डकैती के कारण ज़रूरी चीजों की महंगाई 10-15% बढ़ी है।
सिर्फ़ एक्साइज नहीं, IGST, GST और कस्टम ड्यूटी से भी सरकार मालामाल है। कच्चे तेल पर सेस भी लगता है। फिर कंगाल होकर मोदी सरकार के सामने भीख मांग रही राज्य सरकारें भी 4-5 तरह के टैक्स लगाकर हमें लूटती हैं।
बावज़ूद इसके, 2014-15 में पेट्रोलियम पदार्थों से राज्यों की कमाई 160526 करोड़ से बढ़कर 2019-20 में 220841 करोड़ रुपये ही हुई, यानी महज़ 37.5% की वृद्धि। यानी मोदी सरकार इस डकैती से मालामाल है और राज्य भिखारी बने हुए हैं। डकैती की वजह क्या है, जो गोदी मीडिया और दलाल राष्ट्रवादी पत्तलकार नहीं बताते?
वज़ह है- कराधान नीति की गड़बड़ी। भारत जैसे देश में अमीरों पर टैक्स लगाकर ग़रीबों पर खर्च करना चाहिए। लेकिन आरएसएस और बीजेपी ने इसे उलटकर ग़रीबों पर टैक्स और अमीरों को छूट में बदल दिया है।
मोदी ने बीजेपी को चंदा देने वाले कॉर्पोरेट सेक्टर को 1.45 लाख करोड़ की छूट दी। 2015-16 से 2019-20 के बीच इन्हीं कॉर्पोरेट्स को विभिन्न रियायतों के रूप में 6.08 लाख करोड़ की छूट और मिली। (9 मार्च 2021 को राज्यसभा में सरकार का जवाब)
2018-19 से 2020-21 के बीच इसी मोदी सरकार ने कॉर्पोरेट के 5.9 लाख करोड़ के बैंक लोन माफ़ कर दिए। तो फिर मोदी सरकार से बड़ा कोई डाकू हुआ क्या? इतना ज़ुल्म तो गब्बर सिंह ने भी नहीं किया होगा।
फ़िर भी लोग उफ़्फ़ नहीं कर रहे। क्योंकि हमारी सनातन संस्कृति राजा को भगवान मानकर उसके खिलाफ बोलना नहीं सिखाती। फिर राजा चाहे डाकू ही क्यों न हो। आरएसएस इसीलिए सनातन धर्म की दुहाई देती रहती है और ग़ुलाम अवाम सारी तकलीफें झेल रही है।
वह दिन भी दूर नहीं, जब डाकू इस कंगाल अवाम के घर का सोना और सारी जायदाद बिकवा देगा और बदले में कटोरा थमा देगा। उस वक़्त तक धर्म के नाम पर बीजेपी को वोट देते रहें, क्योंकि लुटना आपकी किस्मत है और लूटना राजा का हक़।

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