रवीश कुमार
बनारस में कुछ काम तो हुआ ही होगा। फंड भी गए होंगे। ऐसा तो हो नहीं सकता। प्रधानमंत्री का क्षेत्र है। काफ़ी कुछ बना भी होगा। तभी तो बनारस के लोग इतने मोहित रहते हैं ।
सात साल में इस शहर ने विश्व स्तरीय बुनियादी ढाँचे देखे हैं। इसकी तुलना जापान के क्योटो से होने लगी है। अध्ययन हो रहे हैं कि कैसे एक शहर विश्व स्तरीय हो गया है। बस बारिश को बनारस की तरक़्क़ी पसंद नहीं है।
अगर प्रधानमंत्री बनारस का दौरा कर लें तो इसी बहाने जलभराव की बची खुची समस्या भी दूर हो जाएगी। सारा सरकारी अमला जुट जाएगा और शहर का भला हो जाएगा। दौरा लेकिन अचानक हो। केवल तीन दिन का नोटिस मिले।

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