सौमित्र रॉय
मिल्खा सिंह चले गए। आगे शायद कई दशकों तक भारत को दूसरा मिल्खा सिंह न मिले। क्योंकि भारत में आजकल सियासत और घर की ज़रूरी, कीमती चीजें बेचना ही प्रमुख खेल है।
क्रिकेट ही भारत में एक ऐसा खेल है, जो पैसा लाकर देता है। वरना भारतीय ओलिंपिक टीम की तो जर्सियां भी मोदी सरकार ने चीन की कंपनी को बेच दी थीं।
मिल्खा सिंह के जीवन का एक बड़ा हिस्सा गुमनामी में बीता है। देश के लिए मेडल लाने वाले कई खिलाड़ी आपको मजदूरी करते, खोमचा लगाते दिख जाएंगे।
आज जब पूरा भारत उड़न सिख के निधन पर शोकमग्न है, रेलवे ने अपने 15 स्पोटर्स कॉम्प्लेक्स और स्टेडियमों को मॉल बनाने के लिए बेचने का आदेश निकाल दिया है। न जाने नरेंद्र मोदी सरकार दुनिया को और कितना शर्मसार करेगी।

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