दिल्ली। कोरोना संक्रमण के मामले घटने के साथ ट्रेन सेवा की मांग में भारी वृद्धि देखी जा रही है। जो प्रवासी लोग कोरोना के चलते घर लौट गए थे, वे अब परदेस लौटना चाहते हैं। लॉकडाउन और कर्फ्यू में ढील के साथ कल-कारखाने शुरू हो गए हैं जिससे रोजगार की मांग बढ़ रही है। लोगों को शहरों तक पहुंचाने के लिए रेलवे हर दिन नई ट्रेनें चला रहा है या बंद पड़ी ट्रेनों को बहाल किया जा रहा है।

श्रमिक और परदेस में कमाने वाले लोग कई-कई दिनों से टिकट के लिए बैठे हैं या करा चुके हैं लेकिन वेटिंग खत्म नहीं हो रही है। वेटिंग को खत्म करने और लोगों को सुरक्षित यात्रा की सुविधा देने के लिए ट्रेन एक साथ कई जोड़ी ट्रेनों को चला रहा है।

भारतीय रेलवे ने बताया है कि यात्रियों की भारी मांग को देखते हुए केवल जून महीने में 660 ट्रेनों को शुरू किया गया है। ये ट्रेनें स्पेशल सेवा में चल रही हैं। रेलवे के एक आंकड़े के मुताबिक, 18 जून तक 983 मेल या एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन हो रहा है। कोविड से पहले का आंकड़ा देखें तो कुल 1768 मेल या एक्सप्रेस ट्रेनें चल रही थीं जो अब 983 की संख्या में ऑपरेट हो रही हैं। 

सेंट्रल रेलवे में 26, ईस्टर्न सेंट्रेल रेलवे में 18, ईस्टर्न रेलवे में 68, नॉर्थ सेंट्रल रेलवे में 16, नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे जोन में 38, नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे जोन में 28, नॉर्थ रेलवे में 158, नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे में 34, साउथ सेंट्रल रेलवे जोन में 84, साउथ ईस्टर्न सेंट्रल रेलवे जोन में 16, साउथ ईस्टर्न रेलवे जोन में 60, सेंट्रल जोन में 70, वेस्टर्न सेंट्रल जोन में 28, वेस्टर्न रेलवे जोन में 16 ट्रेनों को चलाने की मंजूरी दी गई है। यह कुल संख्या 660 है।

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