इब्न ए आदम
कृषि मंत्री तोमर बोल रहे हैं कि हम आधी रात में बात करने को तैयार हैं लेकिन कृषि क़ानून वापस नहीं होंगे । जब कृषि क़ानून ही वापस नहीं होंगे तो तोमर जी बात किस विषय पर करेंगे ?? क्या किसानो से पूछेंगे कि आप बारिश में भीगते हुए कैसे सड़क पर बैठे हो या पूछेंगे कि तपती गर्मी से बचने के लिए आपने क्या उपाय किए थे ?? या पूछेंगे कि कड़कड़ाती ठंड में आप किस होंसले से पुलिस की पानी की बौछारें झेल रहे थे ??
किसानो को मौसम की मार झेलते हुए सात महीने हो गए । बूढ़े , बच्चे , जवान , महिलाएँ दिल्ली बॉर्डर पर बैठे हुए हैं । उनकी केवल दो माँगे हैं , कृषि क़ानून वापस ले लो और MSP गारंटी क़ानून बना दो ।
जब किसान कह रहे हैं कि कृषि क़ानून हमारे हित में नहीं है , आप इन्हें वापस ले लीजिए , हमारा हित मत कीजिए तो सरकार ज़बर्दस्ती उनका हित करने में क्यों लगी है ।
देश में कोई कुछ भी बनाए उसके लिए सरकार MRP निर्धारित करती है । किसान तो MSP माँग रहे है , जो आपके हिसाब से उन्हें न्यूनतम मिलना चाहिए , कम से कम वो तो उन्हें देने की गारंटी दे दो । किसानो के प्रति सरकार ने असंवेदनशीलता की इंतहा कर दी है ।

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