BJP: शर्माजी को नई जिम्मेदारी, इन समीकरणों पर नजर…यूपी में बीजेपी संगठन के ‘गठन’ के क्या मायने, समझिए

बीजेपी ने अगले साल उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनाव से पहले पूरे संगठन का गठन कर एक साथ कई ‘मोर्चों’ को साध लिया है। पार्टी ने करीब साल भर बाद मोर्चों का गठन तो किया ही, साथ ही जिनका समायोजन मोर्चों में नहीं हो सका, उन्हें प्रदेश पदाधिकारी बनाकर संतुलन भी बिठाया है। रिटायर्ड आईएएस एके शर्मा को संगठन में जिम्मेदारी देकर अटकलों-विवादों को विराम दे दिया। वहीं मोर्चों के गठन के लिए चल रही उठापटक को केंद्रीय नेतृत्व के साथ बैठकर सुलझा लिया।

क्षेत्रीय-जातीय समीकरण साधे
बीजेपी ने प्रदेश कार्यकारिणी की सूची अगस्त, 2020 में जारी की थी। करीब साल भर होने को है तो अब पार्टी मोर्चों की सूची जारी कर पाई है। कहा जा रहा है कि कुछ नाम तय नहीं हो पा रहे थे, जिसकी वजह से यूपी संगठन को केंद्रीय नेतृत्व के साथ दिल्ली में बैठना पड़ा। मोर्चों के गठन में क्षेत्रीय-जातीय बैलेंस रखने की कोशिश की गई है। शाक्यों की बहुतायत आबादी वाले और सपा का गढ़ माने जाने वाली बेल्ट के औरैया जिले से आने वाली गीता शाक्य को महिला मोर्चे का अध्यक्ष बनाया गया तो गोरखपुर के क्षत्रिय बिरादरी के पूर्व प्रदेश मंत्री रह चुके कामेश्वर सिंह को किसान मोर्चे का अध्यक्ष बना दिया गया।

मेरठ के बासित अली को अल्पसंख्यक मोर्चे का अध्यक्ष बनाया गया तो गाजियाबाद के नरेंद्र कश्यप को पिछड़ा वर्ग मोर्चे का, अनुसूचित जाति मोर्चे का अध्यक्ष मोहनलालगंज के सांसद कौशल किशोर को बनाए रखा गया है। गोरखपुर के डॉक्टर संजय गोंड को अनुसूचित जनजाति अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। फर्रुखाबाद के प्रांशु दत्त द्विवेदी को युवा मोर्चे का अध्यक्ष बनाकर पिछड़ों, दलितों, अल्पसंख्यकों और क्षत्रियों के साथ ब्राह्मणों को भी साधने की कोशिश की गई है।

प्रदेश अध्यक्ष की चली, दावेदारों का हुआ समायोजन
मोर्चों की पूरी सूची पर प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव की ही छाप दिखाई पड़ रही है। ज्यादातर पदाधिकारी उनके करीबी हैं, जिन्हें सूची में जगह नहीं मिल सकी, उनका समायोजन भी किया गया। अध्यक्ष के करीबी माने जाने वाले प्रांशु दत्त द्विवेदी युवा मोर्चे में मंडल से पदाधिकारी रहे और मौजूदा समय में प्रदेश कार्यकारिणी में मंत्री हैं। वहीं पिछड़ा वर्ग मोर्चे के अध्यक्ष बनाए गए नरेंद्र कश्यप 2017 में बीएसपी से बीजेपी में आए थे और बिहार में ओबीसी मोर्चे के प्रभारी का काम देख रहे थे। इस बार उन्हें भी जगह मिली। अर्चना मिश्रा भी महिला मोर्चे के प्रदेश अध्यक्ष पद की दावेदार थीं, उन्हें प्रदेश में मंत्री बनाकर जगह दी गई। वह महिला मोर्चे की महामंत्री रह चुकी हैं।

पश्चिम के क्षेत्रीय मंत्री अमित वाल्मीकि को भी मंत्री बनाकर एडजस्ट किया गया है। वह अनुसूचित जाति मोर्चे के दावेदार थे। वहीं किसान मोर्चे के अध्यक्ष बने कामेश्वर सिंह प्रदेश अध्यक्ष के साथ लंबे समय से काम कर चुके हैं। उन्हें सीएम योगी का भी करीबी माना जाता है। बासित अली भी अध्यक्ष के करीबी हैं और उन्हें अल्पसंख्यक मोर्चे का पश्चिम का क्षेत्रीय संयोजक स्वतंत्र देव ने ही बनवाया था।

AK SHARMA SWATANTRA DEV

एके शर्मा और स्वतंत्र देव सिंह (फाइल फोटो)

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