सार………

 नशे के सौदागर अपनी काली कमाई का कुछ हिस्सा पुलिस विभाग और सफेदपोश नेताओं को समय समय पर पहुंचाते रहते हैं। इसलिए आज अत्यधिक मात्रा में नशा युवाओं की रगों में जहर बन कर दौड़ रहा है। क्योंकि जिस मादक पदार्थ की बिक्री पर शासन ने रोक लगा रखी है। उसकी बिक्री चप्पे-चप्पे पर पुलिस का पहरा होने के बावजूद प्रतिबंधित नहीं है। जी हां हम बात कर रहे हैं गांजा विक्री! जोकि बंद पुरिया में क्षेत्र के कुछ चुनिंदा स्थानों जैसे मऊ, कैर चौराहा, ताजुद्दीनपुर, महराजगंज कस्बा, हलोर चौराहा, टीसा खानापुर, चंदापुर, हरदोई चौराहा, सलेथू चौराहा, ओसाह चौराहा, अशरफाबाद, डोमापुर, पहरे मऊ हसनपुर चौराहा, बावन बुजुर्ग बल्ला जैसे प्रमुख स्थानों पर धड़ल्ले से खुलेआम बेचा जा रहा है।

विस्तार……..

शिवाकांत अवस्थी

महराजगंज/रायबरेली: एक तरफ जहां सरकार युवाओं का भविष्य सुधारने की दिशा में पुरजोर कोशिश कर रही है। तो वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश में रायबरेली जिले के थाना महराजगंज क्षेत्र सहित समूचे तहसील क्षेत्र में नशे के कारोबारी इन युवाओं का भविष्य गर्त में धकेलने पर लगे हुए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि, चप्पे-चप्पे पर पुलिस का पहरा होने का दावा किया जा रहा है, बावजूद गांजे के तस्कर बेधड़क नशे के कारोबार को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं। विश्वस्त सूत्रों की माने तो महराजगंज थाना क्षेत्र सहित तहसील क्षेत्र में गांजा खुलेआम बेचा जा रहा है। क्षेत्र में पैर जमाए बैठे गांजे के काले कारोबारी पुलिस संरक्षण प्राप्त बेधड़क गांजा के व्यापार को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं, जिससे युवाओं की जिंदगियां गांजे के कस में धुआं बनकर उड़ रही है।

    आपको बता दें कि, उत्तर प्रदेश के रायबरेली जनपद की तहसील महराजगंज नशे का हब बन चुका है। यहां क्षेत्र के गांवों की गलियों में बिक रही गांजे की पुड़िया युवाओं की जिंदगी तबाह कर रही है। क्षेत्र में आज शिक्षा ग्रहण करने वाले युवकों को भी गांजे का कश लगाते देखा जा सकता है। हाई क्लास सोसाइटी में जहां नशा एक फैशन बन गया है, तो वहीं गरीब बस्तियों में रहने वाले युवा भी बीड़ी, सिगरेट में भरकर गांजे का कश लगाते खुलेआम देखे जा रहे हैं।

   आपको यह भी बता दें कि, महराजगंज थाना क्षेत्र में गांजे के काले कारोबारी पान की गुमटियों से लेकर कंप्यूटर संचालक, रेडीमेड कपड़ा व्यवसाई, होटल संचालक तथा कुछ मेडिकल स्टोर संचालक भी अवैध रूप से इस गांजे के काले कारोबार को बड़ी चतुराई से चलाए जा रहे हैं। अत्यधिक मात्रा में व्याप्त नशा लोगों की नसों में जहर बन कर दौड़ रहा है। माना जा रहा है कि, अब इस पर प्रतिबंध लगा पाना पुलिस प्रशासन के लिए संभव नहीं है। वहीं गांजा के नशे में पूरी तरह बर्बाद हो चुके युवाओं के गार्जियनों का तो यह भी मानना है कि, क्षेत्र में धड़ल्ले से फल-फूल रहा नशे के कारोबार को पुलिस और सफेदपोश नेताओं का संरक्षण प्राप्त है।

   सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक नशे के सौदागर अपनी काली कमाई का कुछ हिस्सा पुलिस विभाग और सफेदपोश नेताओं को समय समय पर पहुंचाते रहते हैं। इसलिए आज अत्यधिक मात्रा में नशा युवाओं की रगों में जहर बन कर दौड़ रहा है। क्योंकि जिस मादक पदार्थ की बिक्री पर शासन ने रोक लगा रखी है। उसकी बिक्री चप्पे-चप्पे पर पुलिस का पहरा होने के बावजूद प्रतिबंधित नहीं है। जी हां हम बात कर रहे हैं गांजा विक्री! जोकि बंद पुरिया में क्षेत्र के कुछ चुनिंदा स्थानों जैसे मऊ, कैर चौराहा, ताजुद्दीनपुर, महराजगंज कस्बा, हलोर चौराहा, टीसा खानापुर, चंदापुर, हरदोई चौराहा, सलेथू चौराहा, ओसाह चौराहा, अशरफाबाद, डोमापुर, पहरे मऊ हसनपुर चौराहा, बावन बुजुर्ग बल्ला जैसे प्रमुख स्थानों पर धड़ल्ले से खुलेआम बेचा जा रहा है।

   अब आपको यह बताना जरूरी हो गया है कि, सामाजिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर क्षेत्र के ज्यादातर युवा गांजा का नशा कर रहे हैं, तो वहीं इससे बचने वाले युवा नशीली दवाओं का सेवन भी करने लगे हैं, यह नशीली दवाइयां प्रतिबंधित होने के बाद भी क्षेत्र के मेडिकल स्टोरों पर बेझिझक धड़ल्ले से बेची जा रही हैं। खांसी की रोकथाम के लिए कुछ सिरप युवा अपने नशे की लत को पूरा करने के लिए कर रहे हैं। सरकार द्वारा इन सब की बिक्री पर प्रतिबंध तो लगाया गया था, लेकिन यह प्रतिबंध महज कागजों तक ही सीमित होकर रह गया है। बीते कुछ दिनों से खासकर महराजगंज थाना क्षेत्र में 10, 20 लीटर दारू पकड़ने के अलावा नशे के काले कारोबारियों पर प्रशासनिक चाबुक नहीं चलाया गया है। जबकि क्षेत्र में गांजे का अवैध कारोबार खुलेआम हो रहा है। गांव गांव तक फैले नशे के यह व्यापारी तेजी से लोगों के बीच नशा परोस रहे हैं। इस अवैध व्यापार को रोकने के लिए नारकोटिक्स एक्ट बनाया गया है। लेकिन पुलिस व आबकारी विभाग गांजे की बिक्री पर अंकुश नहीं लगा पा रहा है। जिससे ग्रामीण अंचल में फल-फूल रहे इस कारोबार से तमाम जिंदगियां नशे की लत में आ चुकी हैं। युवाओं में बढ़ती लत के चलते यह कारोबार खुलेआम चल रहा है, लेकिन इस पर अंकुश लगा पाने में जनपद का पुलिस महकमा नाकाम साबित हो रहा है। ऐसा नहीं है कि, पुलिस कार्यवाही नहीं करती है, लेकिन इसके बाद भी बेखौफ कारोबारी नशे के नाम पर मौत के सामान को खुले तौर से परोस रहे हैं। पुलिस और सफेदपोश नेताओं के संरक्षण प्राप्त का दावा करने वाले, यह नशे के कारोबारी धड़ल्ले से गांजे की थोक व फुटकर बिक्री कर रहे हैं।

   नशा कारोबारियों की मानें तो क्षेत्र में प्रतिदिन लगभग हजारों का गांजा बिक्री किया जाता है। इतनी बिक्री का एकमात्र कारण यह है कि, यह कारोबार या तो पुलिस के संरक्षण में फल फूल रहा है, या फिर पुलिस को इसकी जानकारी नहीं है (जो असंभव सा प्रतीत हो रहा है)। इसका सेवन करने वालों को जहां मौका मिला चाढ़ा लेते हैं। अक्सर देखा जाता है कि, नशे के आदी व्यक्ति कहीं भी चिलम सुलगाने लगते हैं, चाहे वह सार्वजनिक स्थान हो, या फिर खुला मैदान। इतना ही नहीं इस तरह का नशा करने वाले लोग सड़क के किनारे भी बैठकर चिलम चढ़ाते देखे जा सकते हैं। और तो और क्षेत्र के बाजारों में कुछ चुनिंदा पान की गुमटियां हैं, जहां पर बेझिझक खुलेआम गांजे की पुड़िया बेची जा रही हैं।



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