Rajesh Shukla

India Nazar Logo – इंडिया नज़र ब्यूरो

 किच्छा – नगला में हाई कोर्ट के आदेश के बाद पीडब्ल्यू विभाग और तराई स्टेट फार्म से नोटिस मिलने के बाद सड़क किनारे बरसो से बसे लोगो में खलबली मची हुई है ,इसको लेकर राजनीति तेज़ हो गई है। जहाँ भाजपा इसको बेदखली से बचाने के लिये सामने आई है,तो वही कांग्रेस ने भी नगलावासियो को बचाने के लिये मोर्चा खोल दिया है। लेकिन जैसे जैसे नोटिस की समय सीमा समाप्त हो रही है,वैसे वैसे नगलावासियो की धड़कने बढ़ती जा रही है।      यहां सवाल यह है कि वर्षो से बसे नगलावासियो का हल क्या राजनीतिक दल निकाल पायेंगे ? राज्य सरकार इनकी किस तरह इनकी मदद करेगी ? क्या इसका हल राजनीतिक न होकर हाई कोर्ट के आदेश के विरुद्ध पुनर्विचार याचिका से कानूनी तौर पर होगा ? इसके साथ ही सबसे बड़ा सवाल नगला को नगर पंचायत बनाने की घोषणा से भी जुड़ा है। जिसके कारण यह मामला तूल पकड़ा है। इन सब सवालों पर किच्छा विधानसभा क्षेत्र के विधायक राजेश शुक्ला से हुई इंडिया नज़र की बातचीत यहां प्रस्तुत है :-

 (विधायक राजेश शुक्ला)

विधायक राजेश शुक्ला का कहना है कि पिछले सत्तर सालो से नगलावासी खंती की ज़मीनो पर बसे हुए है। जो ज़मीन 1952 से लेकर1980 खंती में दर्ज थी,वो 1980 में पीडब्ल्यूडी और तराई स्टेट फार्म में दर्ज हो गई।     विधायक का आरोप है कि एक षड्यंत्र के तहत नगलावासियो को उजाड़ने के लिए रिट दाखिल की गई, उसका कारण नगला को नगर पंचायत का दर्जा देना प्रमुख कारण था। नगला एक राजस्व गॉव था,जो ग्राम सभा या नगर पंचायत में नहीं था। त्रिस्तरीय पंचायत से वंचित थे,मेरे विधायक बनने के बाद नगलावासियो के लिये सरकार से घोषणा करवाई,जिसे पास कर दिया गया है। उनका कहना है कि जिस जिस स्थान पर वो नगर पंचायत बनाने का काम कर रहे है चाहे नगला हो या सिरौली कला या लालपुर कांग्रेस षड्यंत्र कर उसका विरोध कर रही है।

राजेश शुक्ला ने आरोप लगाया कि नगलावासियो को गुमराह करने कम लिये कलेक्ट्रेट में धरना देने गये एक राजनीतिक दल के लोगो के साथ एक भी नगलावासी नहीं था,कांग्रेस ने ही रिट डलवाकर नगर पंचायत को रोकने और नगलावासियो को उजाड़ने का षड्यंत्र रचा गया है,जिसे कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। नगला नगर पंचायत बन कर रहेगी।

विधायक राजेश शुक्ला ने कहा कि इस मामले में वो एक प्रतिनिधिमंडल के साथ मुख्यमंत्री से मिले थे और उन्हें पुराना नक्शा व अन्य साक्ष्य दिखाये है। मुख्यमंत्री ने सचिव आवास और राजस्व को निर्देश दिए है कि माननीय न्यायालय के समक्ष वस्तुस्थिति से अवगत कराये। साथ ही जैसे लालकुआँ में अतिक्रमण में बैठे लोगो को वियमित क्षेत्र घोषित करते हुए विनियमितीकरण किया गया है,उनको मालिकाना हक दिया गया है। उसी तर्ज़ पर हमने मांग की है कि सत्तर साल से बैठे हुए नगलावासियो उनको मालिकाना हक दे और पीडब्ल्यूडी और तराई स्टेट फार्म की ज़मीन से सड़क के मानक के अनुसार ज़मीन छोड़ कर मालिकाना हक दिया जाये।

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