बांदा। जिले में सम्पन हुआ एक अनोखा वैवाहिक कार्यक्रम चर्चा का विषय बन गया है शादी की चर्चा आते ही सामान्तया बरात, बैंडबाजा, आतिशबाजी आदि धूमधड़ाका नजर आने लगता है, लेकिन नरैनी क्षेत्र के गोरे पुरवा में हुई अनोखी शादी इन दिनों चर्चा में है। फिजूल खर्ची और धूमधाम से इतर ईको फ्रेंडली यानी पर्यावरण को किसी प्रकार से कोई नुकसान न पहुंचाने वाले रिवाज से शादी हुई।

लग्जरी कार की जगह बैलगाड़ी में बरात आई और इसी पर दुल्हन की विदाई हुई। स्टेज से लेकर मंडप तक हरे पत्तों और फूलों से सजाया गया था। पत्तों पर भोजन और हर बराती को उपहार में पौधे देकर विदाई पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा दे गए।

गोरे पुरवा में माता-पिता की मृत्यु के बाद वंदना को नरैनी के रहने वाले टीचर व पर्यावरण प्रेमी यशवंत कुमार ने बेटी माना था। मध्य प्रदेश के गोपरा में उसकी शादी तय कर दी। पिछले दिन गोपरा से बैलगाड़ी में गोरे पुरवा बरात आई। दूल्हा कमलेश सिर पर पगड़ी की जगह खजूर का मुकुट लगाए था।

बैंडबाजा, डीजे और आतिशबाजी का शोरशराबा नहीं था। सिर्फ ढोलक की थाप पर महिलाएं मंगल गीत गुंजा रही थीं। विवाह स्थल को फूल-पत्तियों से सजाया गया था। बरातियों और घरातियों को हरे छ्यूल के पत्तों पर नाश्ता और भोजन तथा मिट्टी के कुल्हड़ में पानी व आम का पना परोसा गया। कंडा-लकड़ी में खाना बना। कार्बन उत्सर्जन करने वाले कोई भी साधन का प्रयोग नहीं हुआ। अगले दिन विदाई से पूर्व दुल्हन वंदना और दूल्हा कमलेश ने नीम और आम के पौधे रोपे। साथ ही ससुराल में भी दो पौधे रोपने का उन्हें संकल्प दिलाया गया। इसके बाद बैलगाड़ी में दुल्हन विदा हो गई। इस अनोखी शादी के लगभग 50 बराती व घराती गवाह बने।

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