इब्न ए आदम
25 जून , 1975 में इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगा दिया था । आपातकाल लगाना सही था या ग़लत , आज उस पर लोगों की अलग अलग राय है लेकिन उस समय देश का सम्पूर्ण विपक्ष और आम जनता आपातकाल के विरोध में एकजुट थी ।
लेफ़्ट और राइट साथ साथ थे , संघ और जमात ए इस्लामी एक साथ सभाए कर रहे थे , समाजवादी और अम्बेडकरवादी एक ही मंच से नारे लगा रहे थे । कांग्रेस के कई नेता आपातकाल लगाने के कारण नाराज़ होकर विरोधी गुट में चले गए थे । पूरे देश के पत्रकार , समाजसेवी , राजनीतिक दल अपने भिन्न मतों और विचारधाराओ के साथ लोकतंत्र बचाने के लिए एकजुट थे ।
आज अघोषित आपातकाल है । सरकार के विरोध में उठने वाली हर आवाज़ को दबाया जा रहा है । UAPA , NSA जैसी गम्भीर धाराओं को विरोधियों को दबाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है । चुनी हुई सरकार को राज्यपाल के माध्यम से कमज़ोर किया जा रहा है , विधायक ख़रीदकर सरकारें गिरायी जा रही है । मीडिया चरणो में गिरी हुई है ।
CBI , ED जैसी संस्थाओं को विपक्ष और विरोधियों के ख़िलाफ़ लगाया जा रहा है । न्यायालय तक न्याय देने में विफल साबित हो रहे हैं । धरने प्रदर्शन करने वालों को कपड़ों और पगड़ी से पहचाना जा रहा है । उसके बावजूद विपक्ष एकजुट नहीं है , जनता एकजुट नहीं है , विरोध के स्वर एक साथ नहीं निकल रहे हैं ।
इन हालात में भी अगर हम धर्म की बहस में लगे हैं , जाति की बात कर रहे हैं तो यक़ीन मानिए कि हमें लोकतंत्र की रत्ती भर भी चिंता नहीं है । और जिस चीज़ की आपको चिंता नहीं होती वो तो आपसे छीन ही ली जाती है ।

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