◆नेमलापुर में काटे जा रहे मोटे-मोटे आम के फलदार वृक्ष।

◆जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के चलते सरकार की मंशा पर फिर रहा पानी।

शिवाकांत अवस्थी

शिवगढ़,रायबरेली: जहां एक ओर सरकार पर्यावरण को संरक्षण प्रदान करने के लिए हर जतन कर रही है। ताकि पर्यावरण संतुलन बना रहे। जिसको लेकर सरकार पानी की तरह रुपए बहाकर लगातार वृक्षारोपण एवं जागरूकता अभियान चला रही है। ग्रीन यूपी, क्लीन यूपी बनाने के लिए सरकार सभी से वृक्षारोपण करने की अपील कर रही है। तो वहीं दूसरी ओर पुलिस एवं वन विभाग की खाऊ कमाऊ नीत के चलते वन माफिया बेखौफ होकर हरियाली पर आरा चला रहे हैं। चर्चा है कि, वन विभाग और पुलिस के कुछ कर्मचारियों की साठ-गांठ से वन माफिया बेखौफ होकर प्रतिबंधित हरे पेड़ों पर आरा चला रहे हैं। जिसका जीता जागता उदाहरण शिवगढ़ थाना क्षेत्र के नेमुलापुर मजरे कुम्भी देखा जा सकता है। जहां फलदार आम के पेड़ों की धड़ल्ले से कटाई की जा हैं। वन विभाग जान कर भी अंजान बना हुआ है।

  आपको बता दें कि, नवागन्तुक शिवगढ़ थानाध्यक्ष सोनकर ने शिवगढ़ थाने की कमान संभालते समय क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों एवं पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा था कि, उनके रहते क्षेत्र में एक भी प्रतिबंधित पेड़ की अवैध कटान नहीं होगी। लेकिन आलम यह है कि, थाने से चन्द किलोमीटर व पुलिस के चेकिंग पॉइंट कुम्भी बॉर्डर से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर ही पिछले दो दिनों से बिल्कुल स्वस्थ्य हरे भरे फलदार मोटे- मोटे आम के पेड़ काटे जा रहे हैं। वन माफियाओं को ना तो वन विभाग का खौफ है और ना ही पुलिस का डर। 

  क्षेत्र के लोगों का कहना है कि, धड़ल्ले से हो रही पेड़ों की कटान कहीं ना कहीं वन रक्षकों की संलिप्तता की ओर संकेत करती है। कोविड-19 संकटकाल में ऑक्सीजन के आकाल पढ़ने के बाद भी हो रही पेड़ों की कटान चिंता का विषय बनी हुई है। 

इस बाबत जब थानाध्यक्ष रवीन्द्र सोनकर से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि, वन विभाग के अधिकारियों से बात करो।  जब वन विभाग के डीएफओ महेंद्र सिंह से बात की गई तो, उन्होंने बताया कि, चल रही अवैध कटान के मामले में कार्यवाही की गई है।



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