गिरीश मालवीय
भारत में 80 करोड़ लोग या तो बेघर हैं जो सड़क किनारे, फुटपाथ, फ्लाईओवर, सीढ़ियों के आसपास, मंदिरों, रेलवे प्लेटफॉर्म जैसी जगहों पर रहने को मजबूर हैं, या उनके घर में पूरे परिवार के रहने के लिए केवल एक कमरा है, जिसकी छत प्लास्टिक की पन्नी से बनी हैं। …..जिसकी दीवारें ईट गारे से नही बल्कि घास, छप्पर, बांस आदि से बनी हैं। ग्रामीण क्षेत्र में रहने वालों के घर कच्चे है
भारत में 80 करोड़ लोग के घर में आय का कोई भी स्त्रोत नहीं है। ऐसे लोग जो मजदूरी या इधर-उधर घरेलू काम करके जीवन-यापन करने पर मजबूर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले मुख्य रूप से जीवित रहने के लिए भिक्षा पर निर्भर हैं।
भारत में 80 करोड़ लोग ऐसे परिवार में रहते हैं जिनके मुखिया दिहाड़ी करके घर चलाते हैं या उनकी कोई निश्चित आय नहीं है। या ऐसे परिवार में वे रहते हैं जिनमें कमाई करने वाला कोई वयस्क नहीं है, जो नाबालिगों पर आश्रित हैं। या उनके परिवार विकलांग सदस्य पर या विधवा या एकल महिला पर आश्रित है
आप कहेंगें कि भाई ये कुछ ज्यादा हो गया है ठीक से लगा लो !……..यह तो युगांडा या सोमालिया जैसे देशों की बात लग रही है, लेकिन यह बात मैं नही कह रहा हूँ यह बात सरकार कह रही है इन्हीं मापदंडों के आधार पर मोदी सरकार ने देश के 28 राज्य और 8 केंद्रशासित प्रदेश यानी कुल 36 राज्यों से अंत्योदय अन्न योजना में 80 करोड़ जरूरतमंदों का आंकड़ा जुटाया है। जिन्हें 5 किलो गेूहं/ चावल हर महीने दिया जा रहा है
सरकारी आंकड़ों के अनुसार उपरोक्त लोगो को जो मुफ्त राशन बांटा जा रहा है, उनमें सबसे बड़ी संख्या में उत्तर प्रदेश के लोग हैं, उत्तर प्रदेश की करीब 20 करोड़ पॉपुलेशन में से 15.21 करोड़ आबादी यानी करीब 76% जनता उपरोक्त कैटेगरी में आ रही है……
सरकार कहती है कि अब तो इन लोगो की संख्या 81.35 करोड़ हो गयी है लेकिन सच्चाई यह है कि किस राज्य वास्तव में कितने लोगों को मुफ्त राशन मिल रहा है, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा अब तक नही आया है…..अब 81.35 करोड़ लोगों तक 5 महीने के लिए प्रति माह 5 किलो गेूहं/ चावल पहुंचाने के लिए सरकार 64 हजार करोड़ रुपए सब्सिडी में देना है असली खेल यही होना है

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