मोहम्मद जाहिद
जिला पंचायत चुनाव में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार नामांकन तक नहीं भर पा रहे हैं। सोचिए कि अखिलेश यादव ने कैसी रिढ़ विहीन पार्टी समाजवादी पार्टी बना डाली।
12 जगह पर सपा के प्रत्याशियों को भाजपाई परचा तक दाखिल नहीं करने दिये और भाजपा प्रत्याशी निर्विरोध चुन लिया गया। ऐसे निर्विरोध चुनने वाले कुल 17 अध्यक्ष हैं। कुछ जगह पर तो पुलिस के सामने भाजपा के लोगों ने सपा समर्थकों को पीटा।
इसी लिए कहता हूँ कि अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश की राजनीति की समझ नहीं , वह उत्तर प्रदेश में कनाडा , इंग्लैन्ड और न्यूज़ीलैन्ड की राजनीति करना चाह रहे हैं।
अभी समाजवादी पार्टी में 4 “राॅबिनहुड” सक्रिय होते तो ऐसा करने की किसी की हिम्मत नहीं होती। मुलायम-शिवपाल के समय में ऐसा करने को कोई सोच भी नहीं सकता था।
मैं पहले भी कह चुका हूँ कि भाजपा शुद्ध रूप से गुंडों की पार्टी है जिसमें नीचे से नीचे तक छोटे बड़े अतीक अहमद , मुख्तार अंसारी , राजा भैय्या और डीपी यादव भरे पड़े हैं और यही कारण है कि समाजवादी पार्टी के लोग इनके हाथों पीटे जा रहे हैं।
जिस हकीकत को मुलायम सिंह यादव ने समझा उसे अखिलेश यादव ने नकार दिया क्युँकी मुगलीया सल्तनत की तरह गद्दी मिलना और बात है और जमीनी हकीकत समझ कर चुनाव जीतना और बात है।
अखिलेश यादव ने अपने जीवन में कभी कोई चुनाव नहीं जीता यह सच है , 2012 में भी उन्होंने सिर्फ साईकिल ही चलाई जबकि चुनाव मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव के नेतृत्व में लड़ा गया था जो ज़मीनी हकीकत बेहतर समझते हैं।
अखिलेश यादव इसके बाद हर चुनाव हारे , 2014 लोकसभा चुनाव में सूपड़ा साफ हो गया , 2017 विधानसभा में खुद भी बुरी तरह हार गये , 2019 में फिर हारे जबकि पिछले दोनों चुनाव में कांग्रेस और बसपा से गठबंधन कर लड़े थे , अभी भी अक्ल नहीं आई तो 2022 भी फिर हारेंगे।
अखिलेश यादव क्युँ नहीं समझते कि वह उत्तर प्रदेश की राजनीति कर रहे हैं जहाँ जनता “राबिनहुड” ही पसंद करती है। और मुलायम सिंह यादव ने इसी नस को पकड़ कर तमाम चुनाव जीता।
मुलायम सिंह यादव ने व्यवस्था के समानांतर अपनी हनक बनाने के लिए 4 मज़बूत स्तंभ बनाए थे जिसका एक पैर इलाहाबाद , एक गाजीपुर , एक संभल और एक कुंडा था।
केवल इस व्यूह रचना से ही किसी की हिम्मत नहीं होती थी कि किसी सपाई का नामांकन रोक दे। यह राबिनहुड जहाँ खड़े हो जाते थे , आसपास के 25-30 विधानसभा क्षेत्रों में किसी विरोधी की हिम्मत नहीं होती थी कि कुछ भी गलत कर दे।
जैसे कि आज सपाई हर जगह पीटे जा रहे हैं , कौन पीट रहा है उनको ? कौन नामांकन करने नहीं दे रहा है ? कब अक्ल आएगी अखिलेश यादव को ? नहीं आएगी क्युँकि उनके इर्द गिर्द संघी लोगों को जमावड़ा है जो उनको गलत सलाह देते हैं और भाजपा की होने वाली आलोचना से उनको डराते हैं।
निश्चित रूप से अखिलेश यादव एक डरपोक आदमी है जो उस भाजपा की आलोचना के डर से अपनी पार्टी के छत्रप से दूर हो गये जिस भाजपा ने कहीं अधिक बड़े अपराधियों को देश और प्रदेश के सर्वोच्च पद दे दिये।
यद्धपि में बाहुबल का समर्थक नहीं पर आप खुद देखिए कि समाजवादी पार्टी के 12 सहित 17 प्रत्याशियों को यदि प्रशासन नामांकन नहीं करवा सकता तो यह क्या है ? यह बाहुबल का ज़ोर नहीं है ?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *