गिरीश मालवीय
आपको याद होगा कि पिछले महीने मई में जब वेक्सीन की अनुपलब्धता के कारण वेक्सीन लगाने की रफ्तार बहुत धीमी हो गयी थी तो नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल से मोदी सरकार ने एक घोषणा करवाई थी कि इस साल अगस्त से दिसंबर तक वैक्सीन की 216 करोड़ डोज उपलब्ध हो जाएगी
कल जब इस मामले में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया तो पता लगा कि दिसंबर तक तो वैक्सीन के सिर्फ 135 करोड़ डोज ही मिलेंगे,…… सीधे 81 करोड़ डोज कम कर दी गई वो भी सिर्फ एक महीने में
यानी वैक्सीन की 216 करोड़ भी जुमला निकला है ……..हमने तभी लिख दिया था कि ‘वी के पॉल आधुनिक युग के शेखचिल्ली साबित होने जा रहे हैं वे जिन वेक्सीन की डोज की बात कर रहे हैं उसमें जाइडस कैडिला, सीरम की नोवावैक्स, भारत बॉयोटेक की नेजल वैक्सीन और जीनोवा कंपनी की वैक्सीन का ट्रायल तीसरे फेज में चल रहा है……वह हवा में बनाए गए प्रोडक्शन प्लान की बात कर रहे थे’,
आज जब हलफनामा देने की बारी आई तो इन सारी वेक्सीन के नाम गायब ही हो गए….. ओर तो ओर जो वेक्सीन अभी बन रही है उसकी उपलब्धता भी कम हो गयी पहले कहा गया था कि कोवीशील्ड के 75 करोड़ और कोवैक्सिन के 55 करोड़ डोज दिसम्बर तक उपलब्ध होंगे। लेकिन इस हलफनामे इनकी डोज भी घटाकर 50 करोड़ और 40 करोड़ हो गयी। वहीं, स्पुतनिक-V की उपलब्धता को भी 15.6 करोड़ से घटाकर 10 करोड़ बताया गया है।
यह है इनकी कथनी और करनी में अंतर…….
वैसे यकीन मानिए यह हलफनामा भी झूठ सिद्ध होगा, जब तक दिसम्बर 2021 आएगा तब तक 135 करोड़ डोज भी उपलब्ध नही हो पाएंगे,

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