आवेश तिवारी
यूपी में ऐसी तस्वीरें फिर दिख सकती है। राज्य के रण केन बीजेपी की जीत के लिए चौसर बिछाई जा चुकी है। दो चालों में बोजेपी जीत चुकी है एक मायावती ने घोषणा कर दी है कि वह अकेले चुनाव लड़ेंगी दूसरा पंचायत चुनाव में सपा के 12 उम्मीदवार पर्चे नही दाखिल कर पाए हैं जिसका लाभ निस्संदेह बीजेपी को मिलेगा।
दलित मतों का विभाजन अब बसपा, भाजपा और अन्य दलों के बीच होना तय है।प्रदेश में दलित वर्ग कुल आबादी का 21.5 फीसदी है अगर यह वोट साझा विपक्ष को जाता तो इसका भारी नुकसान भाजपा को सहना पड़ता लेकिन अब यह मुश्किल होगा। कुछ लोग कह सकते हैं कि चंद्रशेखर रावण खेल करेगा, कुछ नही कर पायेगा उनका कोई वोट बैंक नही है।
यूपी में मायावती दलित हितों का हवाला देकर चुनाव बाद भाजपा से गठबंधन कर सकती है। वह जानती हैं कि केंद्र में बीजेपी की सरकार होने से अगर वह राज्य में बीजेपी के साथ होंगी तो ज्यादा ताकतवर होंगी। दुखद यह है कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने दलितों का विश्वास जीतने के लिए जमीन पर कुछ नही किया है। पंचायत चुनाव में अध्यक्ष पद के ज्यादातर उम्मीदवार एक ही बिरादरी से खड़ा करके अखिलेश ने वैसे ही सबको खफा कर दिया है ,कांग्रेस संगठन में भी दलितों का वर्चस्व नही के बराबर है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *