श्याम मीरा सिंह
अख़बारों की हेडलाइन बन रही है कि यूपी जिला अध्यक्ष चुनाव में भाजपा के 17 उम्मीदवारों की निर्विरोध जीतना तय है… आप भाजपा के अंध समर्थक हैं तो ये इस खबर पर एक बार मुस्कुराईए, इस पोस्ट को जल्दी से स्क्रोल करिये और बिना पढ़े आगे बढ़ जाइए. लेकिन अगर जरा सा भी इस देश से प्यार है तो थोड़ा रुकि, और सोचिये कि क्या इन 17 जिलों में मंदिर का पुजारी चुना जा रहा था जो सबने सर्वसम्मति से चुन लिया गया और निर्विरोध ही विजयी हो गए. ये हेडलाइन किसी विजय की हेडलाइनें नहीं हैं ये जनता की वोटों की डकैती की हेडलाइनें हैं. अब इन 17 उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने का रास्ते की जमीनी हकीकत देखिए. उनमें से कुछेक जिलों की कुछ कहानियां आपको बताता हूँ.
मुरादाबाद
————-
मुरादाबाद में भाजपा की प्रत्याशी डॉ. शेफाली निर्विरोध का जीतना तय हो गया है. क्योंकि वहां सपा से जिला अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार अमरीन का प्रस्तावक सपा कार्यालय नहीं पहुंचने दिया गया. सपा जिलाध्यक्ष ने भाजपा पर आरोप लागाया है ”सत्ता के दबाव में पुलिस ने उनके कार्यकर्ताओं पर मुकदमें दर्ज किये, उनके कारोबारों को सील किया. डराया गया, और अंत में सपा उम्मीदवार के प्रस्तावकों को भी पहुंचने नहीं दिया गया.” प्रस्तावक नहीं पहुंचा तो सपा उम्मीदवार नामांकन ही नहीं कर सका. मुरादाबाद में भाजपा के पास 10 पंचायत सदस्य हैं जबकि सपा के पास 11 सदस्य हैं और बसपा के पास 12 पंचायत सदस्य हैं.
मेरठ
——
मेरठ जिले में भी जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए भाजपा के प्रत्याशी का निर्विरोध निर्वाचित होना लगभग तय है. यहां कारण ये रहा है कि मेरठ के डीएम कार्यालय ने नामांकन पत्र में जांच के नाम पर गठबंधन प्रत्याशी सलोनी गुर्जर के नामांकन को ही अस्वीकार कर दिया है. इसके चलते भाजपा के प्रत्याशी गौरव चौधरी का निर्विरोध निर्वाचित होना तय हो गया है.
वाराणसी
—-
मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी बीजेपी की उम्मीदवार पूनम मौर्या का निर्विरोध जीतना तय है. क्योंकि यहां भी समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार चंदा यादव का नामांकन पत्र खारिज कर दिया गया है. जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर चंदा यादव का नामांकन पत्र अस्वीकृत कर दिया है और बीजेपी प्रत्याशी के पर्चे को वैध मान लिया. बताया जा रहा है कि स्क्रूटनी के समय यूपी के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर भी मौके पर पहुंचे हुए थे और इसके बाद ही सपा उम्मीदवार का नामांकन निरस्त किया गया है.
मऊ
———
मऊ में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए भी भाजपा के उम्मीदवार मनोज राय को निर्विरोध चुना गया है. सपा द्वारा राम नगीना यादव को अपना प्रत्याशी घोषित किया गया था लेकिन उन्हें नामांकन ही नहीं करने दिया गया. यहाँ समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष ने प्रेसवार्ता करके जिला प्रशासन द्वारा उनके प्रत्याशी को गायब करने का संगीन आरोप लगाया है. समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष धर्म प्रकाश यादव ने बताया है ”जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर आज नामांकन का दिन था. समाजवादी पार्टी के सभी कार्यकर्ता नामांकन करने के लिए तैयार थे. लेकिन कल से ही हमारा प्रत्याशी घर पर ही नहीं है. प्रशासन के लोग कल शाम को हमारे प्रत्याशी राम नगीना यादव के घर पर गए थे, जिसमें एडीएम और उनके साथ पुलिस फोर्स भी थी. मैं भी वहां पर मौजूद था. उनके घर पर जाकर इन लोगों ने उनको धमकाने का काम किया और घोसी कोतवाली में जाकर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया. घर के पूरे परिवार को डराया धमकाया गया और कल से हमारे प्रत्याशी लापता है.”
गाजियाबाद
————-
गाजियाबाद में भी समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के प्रस्तावक को गायब करवा दिया गया. समाजवादी पार्टी का कैंडिडेट अपना नामांकन ही नहीं कर सका. जबकि भाजपा की प्रत्याशी ममता त्यागी ने अपना नामांकन कर दिया है. भाजपा के पास कुल 14 सीटों में से महज 2 सीटें हैं. लेकिन फिर भी उसका जीतना तय सा ही है. प्रस्तावक गायब होने के बाद समाजवादी पार्टी और लोकदल के लोग गाजियाबाद के कंट्री इन होटल पर धरने पर बैठ गए, उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने जो प्रस्तावक बनाया था उसको कैद कर लिया गया है और इनके होटल में रखा है.
झांसी
———–
झांसी में भी समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी आशा कमल गौतम नामांकन ही नहीं कर सकीं. पार्टी आरोप लगाती रह गई है, सपा ने आरोप लगाया गया है कि सत्ता के बल पर पुलिस की मदद से पार्टी सदस्यों को नामांकन करने के पहले ही रोक लिया गया गया है. प्रस्तावक व अनुमोदक के झांसी न पहुंचने के कारण सपा प्रत्याशी आशा कमल का नामांकन नहीं हो सका, इस प्रकार जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी पर भाजपा के पवन गौतम का निर्विरोध निर्वाचन होना तय माना जा रहा है.
गोरखपुर
—————
गोरखपुर जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए भाजपा समर्थित प्रत्याशी साधना सिंह को निर्विरोध निर्वाचित माना जा रहा है. क्योंकि सपा प्रत्याशी जितेंद्र यादव नामांकन पत्र ही दाखिल नहीं कर सके. जितेंद्र नामांकन दाखिल करने निकले. लेकिन कलेक्ट्रेट गेट पर ही भाजपा कार्यकर्ताओं से विवाद हो गया. भाजपा कार्यकर्ताओं ने मुख्य गेट बंद कर दिया था, इस कारण जितेंद्र नामांकन स्थल तक नहीं पहुंच सके. इस घटना से नाराज सपा नेताओं ने कलेक्ट्रेट स्थित शास्त्री चौक पर प्रदर्शन किया.
——-
अगली बार भाजपा के निर्विरोध जीतने की हेडलाइनें पढ़ना तो उन्हें जीतने की मत पढ़ना, वे लूटने की हेडलाइनें हैं, इसलिए लूट की ख़बरों में पढ़ना. क्या इसलिए लाखों भारतवासी वोट डालने के लिए जाते हैं?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *