एक लाख 70 हजार 304 की आबादी में महज 11704 को ही लगे टीके।

शिवाकांत अवस्थी

महराजगंज/रायबरेली: महराजगंज/रायबरेली: सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा लाख कोशिशों के बावजूद क्षेत्र में कोरोना टीकाकरण का कार्य वह रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है, जिसकी जरूरत है। गांव में टीकाकरण को लेकर फैली तमाम भ्रांतियों के चलते लोग टीकाकरण के नाम से विदक जाते हैं, और स्वास्थ्य टीमें गांव पहुंचकर लोगों को टीकाकरण के लिए बुलाते हैं, तो लोग टीमों का उपहास उड़ा कर टीका नहीं लगाते हैं। जिससे सरकार के मंसूबों पर पानी फिर रहा है। वहीं कोरोना को जड़ से उखाड़ फेंकने का संकल्प पूरा भी होगा, इसमें संशय बरकरार है।    

   आपको बता दें कि, एसके इंडिया न्यूज़ की टीम ने महराजगंज ब्लॉक के मऊ ताजुद्दीनपुर तथा मोन गांव सभा का सर्वेक्षण करके हकीकत जानने का प्रयास किया, तो पता चला कि, अभी तो नाम मात्र का ही टीकाकरण हुआ है, अभी काफी मंजिल तय करनी बाकी है। इसके लिए एक बड़े जनांदोलन की आवश्यकता है।

   मऊ गांव पहुंचने पर स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता श्याम भवन सिंह ने एसके इंडिया न्यूज़ को बताया कि, मऊ गांव टीकाकरण के मामले में काफी पीछे है। हालांकि यहां टीकाकरण करने के लिए दो बार टीमें आई, किंतु लोगों ने टीका लगवाने पर ध्यान ही नहीं दिया। बार-बार स्वास्थ्य कर्मियों के बुलाने के बावजूद लोग घरों से नहीं निकले। अब वह लोग प्रयास करेंगे की जनता को जागृत करके उन्हें प्रेरित किया जाए।


    वहीं गांव के ही ललित कुमार नाई 38 ने एसके इंडिया न्यूज़ से कहा कि, टीमें आती हैं, किसी को पता नहीं चलता, ना ही समाज के जागरूक लोगों से मदद ली जा रही है। इसलिए टीकाकरण का काम गति नहीं पकड़ रहा है।

    तो वहीं मऊ के ही अजय कुमार गुप्ता जोकि शिक्षित व्यक्ति हैं। उन्होंने कहा कि, वह लगातार लोगों को जागरूक कर रहे हैं तथा उन्होंने स्वयं भी टीका लगवाया है। घर-घर जाकर वह लोगों को प्रेरित कर रहे हैं। उनका प्रयास है कि, 18 से अधिक आयु के प्रत्येक व्यक्ति को टीका लगवाना चाहिए, अब उनकी पहल रंग ला रही है। तमाम लोग टीकाकरण के लिए तैयार हो रहे हैं।

   इसके पश्चात एसके इंडिया न्यूज़ की टीम ने पड़ोस के गांव अन्दूपुर मजरे ताजुद्दीनपुर पहुंची। वहां पर रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी राम पदारथ शुक्ला 74 से मुलाकात हुई, तो उन्होंने बताया कि, गांव में अशिक्षा के चलते लोग अफवाहों पर ज्यादा ध्यान देते हैं। एक तो गांव वालों को समझाने के लिए यहां स्वास्थ्य विभाग का कोई कारिंदा नहीं रहता है, और ना ही यहां एनम सेंटर है। लोगों को जागरूक करने के लिए उन्होंने स्वयं सबसे पहले टीका लगवाया। तब जाकर गांव वालों ने शुरुआत की, और काफी अच्छी संख्या में टीकाकरण हुआ है। लेकिन यह नाकाफी है। सरकारी कर्मियों को चौपाल लगाकर गांव में लोगों को जागरुक करना चाहिए।

  जबकि इसी गांव के धर्मराज सिंह 65 ने बताया कि, टीकाकरण के लिए गांव गांव में कैंप लगाने से पहले लोगों को सूचित किया जाना चाहिए, और समाज के प्रबुद्ध और जाने-माने लोगों में विश्वास जगाना चाहिए, तभी टीकाकरण संभव हो सकता है।

   गांव के ही विनोद कुमार सिंह 55 ने बताया कि, उनका गांव जिले के सबसे पिछड़े और उपेक्षित गांव में है। इसलिए यहां सरकारी योजनाओं की जानकारी सबसे बाद में मिलती है। हालांकि उन्होंने वैक्सीनेशन को आज की सबसे बड़ी जरूरत समझते हुए सबसे पहले खुद टीका लगवाया और दिन-रात वह दलित व मलिन बस्तियों में जाकर लोगों को जागृत करते हैं, तथा टीकाकरण के लिए लगातार उत्साहित कर रहे हैं।

    इसके उपरांत एसके इंडिया न्यूज़ की टीम ने ब्लॉक क्षेत्र के सबसे बड़े गांव में शुमार किए जाने वाले मोन गांव का जायजा लिया तो, यहां उनकी मुलाकात आकाश सिंह 20 से हुई। आकाश सिंह ने बताया कि, 18 प्लस से टीकाकरण के लिए उन्हें पंजीकरण में ही बड़ी परेशानी हुई, क्योंकि कभी साइड बंद मिली, तो कभी सरवर डाउन रहा। कई बार दौड़ने के बाद उनका रजिस्ट्रेशन हुआ, उन्हें खुशी है कि, निर्धारित तिथि पर उन्हें टीका लग गया। अब गांव के अन्य युवाओं को प्रेरित करके वह टीकाकरण कराने में अपना योगदान दे रहे हैं।

  जबकि गांव के समाजसेवी चंद्रभान सिंह राठौर 48 ने कहा कि, यहां स्थित एनम सेंटर पर पहले तो एनम मौजूद रहती थी, और ग्रामीण महिलाओं को समझा-बुझाकर स्वास्थ्य कार्यक्रमों की जानकारी देकर तैयार करती थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों से एनम सेंटर बंद है, महिलाओं को समझाने में महिला कर्मचारियों का रोल अधिक प्रभावी रहता है। फिलहाल पुरुषों में भ्रांति दूर हुई है, लेकिन सरकार को और अधिक जागरूकता फैलाने के लिए काम करना पड़ेगा।

    इसी क्रम में गांव के युवा समाजसेवी व अग्रणी व्यवसाई शैलेंद्र प्रताप उर्फ राहुल साहू ने एसके इंडिया न्यूज़ की टीम को बताया कि, टीकाकरण ही कोरोना से बचाव का एकमात्र पक्का उपाय है। इसके लिए लगातार वह गांव का भ्रमण करके सुबह और शाम लोगों को जागरूक कर रहे हैं। अच्छी बात यह है कि, जहां पुरानी सोच के लोग फैली अफवाहों से कोरोना टीका लगवाने में परहेज कर रहे हैं, तो वहीं युवा वर्ग बढ़-चढ़कर उनके प्रयासों से टीकाकरण करवा रहा है। यदि कोई युवा टीकाकरण के लिए सीएचसी जाने की बात कहता है, तो वह अपने साधन से लोगों को भेजकर टीका लगाते हैं, और उनके मोन गांव में अब टीकाकरण अभियान तेजी पकड़ रहा है।

  उधर कोरोना टीका करण अभियान में सुस्ती को लेकर सरकारी महकमा ही नहीं जनप्रतिनिधि भी काफी चिंतित है, और उनका कहना है कि, व्यापक जन जागरूकता फैलाकर ही लोगों को टीका लगवाने के लिए प्रेरित कर सकती है। इसके लिए सबको मिलजुल कर चाहे वह शिक्षक हों, या फिर सरकारी सेवा में हो, मीडिया से जुड़े हो, रिटायर्ड पुलिस और सैन्य कर्मी हो, सबको संगठन बनाकर घर घर जाकर लोगों को जागृत करना पड़ेगा। क्योंकि कोरोना महामारी से बचाव में टीकाकरण ही एकमात्र उपाय है।

   इसी क्रम में हमने मऊ गांव के नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान भेलई मौर्य से मुलाकात की, तो उन्होंने भी कोरोना टीकाकरण अभियान में आम लोगों को रुचि न लेने की बात को लेकर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि, इस महा अभियान को सफल बना कर मानवता को इस भयानक खतरे से बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि, वह अपने गांव के निवर्तमान ब्लाक प्रमुख सत्येंद्र सिंह, पूर्व ग्राम प्रधान नीलम सिंह के अलावा समाज के प्रबुद्ध जनों के साथ एक कार्य योजना बनाएंगे, और टीकाकरण के लिए आम जनता को जागरूक करने के लिए घर घर जाएंगे।

   वहीं हमने ताजुद्दीनपुर के पहली बार चुने गए ग्राम प्रधान विनोद कुमार साहू उर्फ बवाली से संपर्क किया, तो उन्होंने कहा कि, हालांकि उनके गांव में काफी कोशिशों के बाद टीकाकरण अभियान ने गति तो पकड़ी है, लेकिन परिणाम अपेक्षित नहीं आए हैं। वह अपने गांव के सभी सहयोगियों बुजुर्गों महिलाओं तथा युवकों से आवाहन करते हैं कि, आज वक्त की जरूरत को समझे। दूसरी लहर समाप्त होने को है, तीसरी लहर के आने की आशंका बनी हुई है। इसलिए सभी का टीकाकरण कराना उनकी जिम्मेदारी है।

    इसके उपरांत हमने मोन गांव की नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान श्याम कला से मुलाकात की, तो उन्होंने कहा कि, कोरोना टीकाकरण में महिलाओं की भागीदारी काफी कम है। वह अपने ग्राम पंचायत कमेटी की बैठक बुलाकर अपने सभी ग्राम पंचायत सदस्य व अन्य जनप्रतिनिधियों, सेवानिवृत्त कर्मचारियों, अधिकारियों के साथ प्रत्येक ग्रामीण से मिलेंगी, और उनको बताएंगी कि, टीकाकरण का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। कोरोना से बचाव में टीकाकरण ही रामबाण है। इसलिए टीकाकरण शत प्रतिशत होना चाहिए, वह पूरा प्रयास करेंगी।

   बीपीसीएम शिवाकांत तिवारी का क्या कहना है: सीएचसी पर तैनात बीपीसीएम शिवाकांत तिवारी ने बताया कि, मऊ गांव में अब तक मात्र 20 लोगों को टीका लग पाया है, जिसमें 16 पुरुष और 4 महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा मोन गांव में 202 लोगों का टीकाकरण किया गया। जिसमें महिलाओं की संख्या 72 और पुरुषों की संख्या 130 रही। जबकि ताजुद्दीनपुर गांव में कुल 190 लोगों को टीका लगाया गया जिसमें पुरुषों की संख्या 119 और महिलाओं की 71 रही। गांव में 18 प्लस से अधिक लोगों ने टीका न लगवा कर स्वास्थ्य केंद्रों पर रजिस्ट्रेशन कराकर वहीं जाकर टीका लगवाया है।

   सीएचसी अधीक्षक डॉक्टर राधाकृष्णन के मुताबिक अब वैक्सीनेशन की प्रक्रिया जोर पकड़ने लगी है। समाज के जागरूक व्यक्तियों से पूरा सहयोग मिल रहा है। प्रशासनिक मशीनरी भी युद्ध स्तर पर टीकाकरण के काम में स्वास्थ्य विभाग का सहयोग कर रहा है। महराजगंज सीएचसी क्षेत्र के अंतर्गत 85 हजार लोगों का टीकाकरण किया जाना है, अभी तक 11707 लोगों को टीके लगाए जा चुके हैं। जिनमें युवा वर्ग के लोग भी बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 2455 लोगों को टीका लग चुका है। कुल आबादी के 55% लोगों को ही टीका लगाया जाना है। आबादी लगभग 1 लाख 70 हजार 304 है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि, कोरोना को दूर भगाने के लिए टीकाकरण के काम में सभी लोग आगे आए, और टीका जरूर लगवाएं। सरकार द्वारा पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन उपलब्ध कराई जा रही है।

आंकड़ों के आईने में तीनों ग्राम पंचायतें:

 1- ताजुद्दीनपुर 

आबादी: लगभग 4000

टीकाकरण हुआ लगभग 5%

यहां कोई एनम सेंटर नहीं है।

2- ग्राम पंचायत मऊ गर्बी

आबादी: लगभग 9000

एनम सेंटर पंचायत भवन में संचालित हो रहा है।

टीके लगे लगभग 6%

3- ग्राम पंचायत मोन

आबादी: लगभग 8000

एनम सेंटर गांव के अंदर आबादी में है।

टीके लगे 4%



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