इब्न ए आदम
असली वीर वो होता है जो खुद अपने नाम के आगे वीर नहीं लगाता बल्कि उसके जाने के बाद ज़माना उसे वीर बोलता है । ऐसे ही शूरवीर भारत के लाल वीर अब्दुल हमीद का आज जन्मदिन है । उस माँ , उस धरती को हज़ारों सलाम जिसने ऐसे वीर को जन्म दिया ।
1965 के युद्ध में वीर अब्दुल हमीद के अद्भुत साहस से भारतीय सेना में वो जोश आया था कि उन्होंने लाहौर के बड़की पुलिस स्टेशन के ऊपर तिरंगा झंडा लहरा दिया था ।
यह तिरंगा पाकिस्तानी सदर जेनरल अय्यूब को कमज़ोर से दिखने वाले शास्त्री जी का जवाब था । जेनरल अय्यूब के दिल्ली में चाय पीने वाले बयान पर शास्त्री जी ने मुस्कुराकर कहा था कि सदर साहब बड़े आदमी है , उन्हें दिल्ली आने की तकलीफ़ नहीं देंगे , लाहौर में रिसीव करेंगे ।
शास्त्री जी घर में घुसकर मारने को नहीं बोला था , ना सीने की नाप दिखायी थी लेकिन शांत स्वभाव के शास्त्री जी के नेतृत्व में भारतीय सेना ने लाहौर में तिरंगा लहरा दिया था ।

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